रायपुर। छत्तीसगढ़ की शान और पहली रामसर साइट कोपरा जलाशय एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। दरअसल, यहां प्रस्तावित एक स्टील एवं पावर प्लांट के लिए तैयार की गई इनवायरमेंट इंपैक्ट एसेसमेंट (EIA) रिपोर्ट पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस रिपोर्ट में कथित तौर पर भ्रामक जानकारी दी गई है, जिसे लेकर अधिवक्ता संदीप तिवारी और वाइल्डलाइफ फोटोजर्नलिस्ट सत्यप्रकाश पांडेय ने मोर्चा खोल दिया है।
रिपोर्ट में दावा- 10 किमी तक कोई वन्यजीव नहीं
बता दें कि प्लांट लगाने वाली कंपनी की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि परियोजना स्थल के 10 किलोमीटर के दायरे में किसी भी वन्यजीव का कोई रास्ता (Migration Route) नहीं है।

जानें हकीकत क्या है
गौरतलब है कि कोपरा जलाशय 161 प्रजातियों के पक्षियों का घर है। यहां सेंट्रल एशियन फ्लाईवे के जरिए हर साल साइबेरिया और मध्य एशिया से 58 प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आते हैं। अगर यहां प्लांट लगता है, तो इन पक्षियों का अंतरराष्ट्रीय मार्ग पूरी तरह तबाह हो जाएगा।

जांच पर उठ रहे सवाल
मामला बढ़ता देख वेटलैंड अथॉरिटी ने बिलासपुर कलेक्टर को पत्र भेजकर दर्ज शिकायतों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, अधिवक्ता संदीप तिवारी का कहना है कि यह एक तकनीकी मामला है और इसकी जांच वेटलैंड अथॉरिटी को खुद करनी चाहिए, क्योंकि जिला प्रशासन के पास पक्षियों के इस जटिल अंतरराष्ट्रीय रूट की जांच करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञ नहीं हैं।
विकास की बलि चढ़ेगा पर्यावरण?
दरअसल, कोपरा जलाशय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भ्रामक रिपोर्ट के आधार पर यहां फैक्ट्रियों को मंजूरी दी गई, तो यह न केवल पक्षियों के लिए काल बनेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की छवि भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर खराब होगी।



