टीआरपी डेस्क। हिंदू धर्म में माता सीता को त्याग, धैर्य और पवित्रता की साक्षात प्रतिमूर्ति माना जाता है। देवी लक्ष्मी का स्वरूप मानी जाने वाली मिथिला राजकुमारी और भगवान श्रीराम की अर्धांगिनी माता सीता का जन्मोत्सव हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को ‘सीता नवमी’ के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 25 अप्रैल, शनिवार को देशभर में पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। जानकारों के अनुसार, नवमी तिथि आज यानी 24 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 21 मिनट से प्रारंभ हो चुकी है, जो कल 25 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 27 मिनट तक प्रभावी रहेगी।
दांपत्य जीवन में आएगी मिठास: जानकी चालीसा और 16 श्रृंगार का विशेष महत्व
वैवाहिक जीवन में चल रही अनबन को दूर करने और रिश्तों में मधुरता लाने के लिए सीता नवमी का दिन सर्वोत्तम माना गया है। मैदानी सूत्रों और जानकारों की मानें तो इस दिन माता जानकी को 16 श्रृंगार की सामग्री और लाल चुनरी अर्पित करने से अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। पूजा के दौरान जानकी स्तुति, जानकी चालीसा और रामायण का पाठ करना विशेष फलदायी होता है। अंत में छोटी कन्याओं को श्रद्धापूर्वक भोजन कराने से घर में लक्ष्मी का वास होता है और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
इन गलतियों से नाराज हो सकती हैं माता: तामसिक भोजन और विवाद से रहें दूर
सीता नवमी का पर्व पूर्णतः सात्विकता और शुद्धता का प्रतीक है, इसलिए इस दिन कुछ सावधानियां बरतना अनिवार्य है। घर के वातावरण को कलह-क्लेश से मुक्त रखें और भूलकर भी किसी मेहमान या जरूरतमंद का अपमान न करें। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन मांस-मदिरा जैसे तामसिक पदार्थों का सेवन वर्जित है। माता सीता को स्वच्छता अत्यंत प्रिय है, इसलिए घर और पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखें। पूजा में गाय के घी का दीपक जलाएं और माता को पीले फल व गुड़ का भोग लगाएं, जिससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सौभाग्य प्राप्त होता है।


