टीआरपी डेस्क। मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के खतरों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था भी अछूती नहीं है।

इन हालातों के बीच अक्सर लोगों के मन में जिज्ञासा होती है कि भारत की करेंसी की कीमत ईरान में क्या होगी। ताजा आर्थिक आंकड़ों के मुताबिक, अगर आप जेब में भारत का महज 100 रुपये का नोट लेकर ईरान पहुंचते हैं, तो वहां की मुद्रा के हिसाब से आप हजारों के मालिक बन जाएंगे।

100 रुपये और 46 हजार की गड्डी: कागज पर मजबूती लेकिन असलियत कुछ और

वर्तमान विनिमय दर पर नजर डालें तो भारतीय रुपये के सामने ईरानी रियाल की हालत बेहद खस्ता नजर आती है। दरअसल भारत का एक रुपया करीब 446 ईरानी रियाल के बराबर बैठता है, जिसका मतलब है कि आपके 100 रुपये ईरान में 46,000 रियाल से भी ज्यादा हो जाएंगे। हालांकि यह आंकड़ा सुनने में बड़ा लगता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और भयंकर महंगाई ने वहां पैसे की क्रय शक्ति को पूरी तरह खत्म कर दिया है। हालात यह हैं कि वहां रोजमर्रा की साधारण चीजें खरीदने के लिए भी लोगों को झोला भरकर पैसे ले जाने पड़ते हैं।

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प्रतिबंधों की मार और कमजोर रियाल का संकट: क्यों रसातल में जा रही है ईरान की करेंसी

ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से वैश्विक प्रतिबंधों और राजनीतिक अस्थिरता का शिकार रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले रियाल की कीमत लाखों में गिर चुकी है, जिससे आयात काफी महंगा हो गया है। ईरानी लोग अब आधिकारिक मुद्रा रियाल के बजाय लेनदेन में तोमान का अधिक उपयोग करते हैं, जो रियाल के मुकाबले थोड़ा सरल माना जाता है। भारत और ईरान के बीच कच्चे तेल के पुराने संबंधों के कारण मिडिल ईस्ट की हर हलचल भारतीय बाजार को प्रभावित करती है, लेकिन करेंसी की तुलना में भारतीय रुपया ईरानी रियाल से कोसों आगे और मजबूत स्थिति में खड़ा है।