Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। अगर कोई माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहता है, तो अब उसे बड़े शहर जाने या कलेक्टर-एसपी का इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

साय सरकार ने केंद्र की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास कार्ययोजना के तहत एक बड़ा बदलाव किया है। अब ग्राउंड लेवल पर तैनात SDM और SDOP को भी सरेंडर कराने की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

ग्राउंड लेवल के अफसरों को मिली असली पावर

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गृह विभाग ने एक ताजा अधिसूचना जारी की है। अब नक्सली अपने ही इलाके के एसडीएम (SDM) और एसडीओपी (SDOP) के सामने जाकर हथियार डाल सकते हैं। दरअसल, पहले देखा गया था कि छोटे कैडर के नक्सली सरेंडर तो करना चाहते थे, लेकिन बड़े अफसरों तक पहुंचने के चक्कर में वे पकड़े जाने या मारे जाने के डर से पीछे हट जाते थे। अब वे अपने पास के तहसील ऑफिस या पुलिस सब-डिवीजनल ऑफिस में जाकर अपनी नई जिंदगी शुरू कर सकते हैं।

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नक्सली प्रोफाइलिंग में नहीं होगी देरी

अक्सर आत्मसमर्पण के बाद नक्सलियों को सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए महीनों भटकना पड़ता था, क्योंकि उनके पुराने रिकॉर्ड और प्रोफाइल का मिलान नहीं हो पाता था। अब नई व्यवस्था के तहत सरेंडर के वक्त ही अधिकृत अधिकारी एक विशेष ‘प्रोफार्मा’ में पूरी जानकारी दर्ज करेगा। जिला पुलिस अधीक्षकों (SP) को सीधे पावर दे दी गई है कि वे प्रोफाइल को तुरंत अपडेट करें। जांच अधिकारी मौके पर ही तय करेंगे कि सरेंडर करने वाला व्यक्ति वाकई नक्सली संगठन का हिस्सा रहा है या नहीं।

देश के किसी भी कोने में कर सकेंगे सरेंडर

सरकार ने नक्सलियों को एक और स्पेशल छूट दी है। अगर कोई माओवादी छत्तीसगढ़ पुलिस पर भरोसा नहीं कर पा रहा है, तो वह राज्य के बाहर भी सेना या सीएपीएफ (CRPF/BSF) की किसी भी यूनिट के सामने जाकर सरेंडर कर सकता है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि उनका मकसद केवल डंडा चलाना नहीं, बल्कि गुमराह हुए युवाओं को वापस समाज की मुख्यधारा में जोड़ना और उनके जीवन को सरल बनाना है।

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