टीआरपी डेस्क। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रविवार को ताबड़तोड़ छापेमारी कर पूरे प्रशासनिक और राजनीतिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। छुट्टी के दिन शुरू हुई इस कार्रवाई से न केवल कारोबारी जगत बल्कि रसूखदारों की भी नींद उड़ गई है।
जांच एजेंसी की अलग-अलग टीमें एक साथ कोलकाता, बर्दवान और हाबरा समेत करीब 9 ठिकानों पर पहुंचीं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई करोड़ों के गेहूं घोटाले और फरार आरोपी ‘सोना पप्पू’ से जुड़े जमीन कब्जाने के मामलों को लेकर की गई है।
सोना पप्पू के ठिकानों पर रेड
कोलकाता के पॉश इलाके आनंदपुर और अलीपुर में आज सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब ED की गाड़ियों का काफिला दो बड़े कारोबारियों के घर के बाहर रुका। बताया जा रहा है कि ये दोनों कारोबारी लंबे समय से फरार चल रहे जमीन माफिया सोना पप्पू के संपर्क में थे।
रिपोर्टर को मिली जानकारी के अनुसार, सोना पप्पू पर जमीन कब्जाने और अवैध वित्तीय लेन-देन के कई गंभीर आरोप हैं। जांच एजेंसी को शक है कि फरार होने के बावजूद उसके काले साम्राज्य का पैसा इन्हीं कारोबारियों के जरिए इधर-उधर किया जा रहा था। टीम ने घर के अंदर मौजूद दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों को खंगालना शुरू कर दिया है।
गरीबों के गेहूं पर डाका, सप्लायर्स के उड़े होश
जमीन मामले के साथ-साथ ED ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) यानी राशन घोटाले की परतें खोलना भी शुरू कर दिया है। बर्दवान और हाबरा में उन एक्सपोर्टर्स और सप्लायर्स के यहां रेड पड़ी है, जिनका नाम घोजाडांगा लैंड कस्टम्स स्टेशन से जुड़े एक अधिकारी की शिकायत में सामने आया था।
घोटाले का तरीका देख अधिकारी भी हैरान
जानकारी के अनुसार गरीबों के लिए आने वाले गेहूं को सिस्टम से चोरी कर खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा गया। इस खेल में केवल छोटे डीलर नहीं, बल्कि बड़े एक्सपोर्टर्स और बिचौलिए भी शामिल हैं। दस्तावेजों में गेहूं को गरीबों तक पहुंचाना दिखाया गया, जबकि असल में माल गोदामों से गायब था।
प्रशासन ने कसी कमर, और भी होंगे खुलासे
कोलकाता के स्थानीय सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़े बंगाल में इस कार्रवाई के कई मायने निकाले जा रहे हैं। ED की टीम ने कुछ संदिग्धों के मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त किए हैं। एजेंसी अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि इन घोटालों का पैसा कहीं चुनाव में तो इस्तेमाल नहीं होने वाला था। अधिकारियों का दावा है कि जैसे-जैसे कड़ियां जुड़ेंगी, आने वाले सात दिनों के भीतर कुछ बड़े नामों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।


