रायपुर। आज पूरे देश में धूमधाम के साथ हरियाली तीज का त्यौहार मनाया जा रहा है। श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को तीज का त्यौहार मनाया जाता है। हरतालिका तीज / तीजा की पूजा प्रदोष काल में की जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं संध्‍या के समय फिर से स्‍नान कर साफ और सुंदर नए वस्‍त्र धारण करने के साथ ही सोलह श्रृंगार करती हैं ।

फाइल फोटो
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भगवान शिव-पार्वती और गणेश की प्रतिमा बनाई जाती है

इसके बाद गीली मिट्टी से भगवान शिव-पार्वती और गणेश की प्रतिमा बनाई जाती है। वहीँ प्रसाद के रूप में पंचामृत तैयार किया जाता है। सुहाग की सामग्री अच्‍छी तरह से सजाकर मां पार्वती को अर्पित किया जाता है। साथ ही भगवान शिवजी को वस्‍त्र अर्पित किया जाता है । इसके बाद व्रत कथा का वाचन-श्रवण किया जाता है।

ऐसी है मान्यता

इस पूजन में ककड़ी और हल्‍वे का नैवेद्य लगाया जाता है। नैवेद्य चढ़ाने के बाद ककड़ी खाकर व्रत का पारण किया जाता है। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजन/व्रत पूर्ण होने पर सुहागिनों को वरदान प्राप्त होता है। वहीँ माना जाता है कि इसी दिन मां पार्वती ने भगवान शिव को कठोर तपस्या करके प्राप्त किया था। वृक्ष,नदियों तथा जल के देवता वरुण की भी इस दिन उपासना की जाती है। कुवांरी लड़कियां यह त्यौहार मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए मनाती हैं।

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वहीँ अगर किसी कन्या का विवाह नहीं हो पा रहा हो तो उसे इस दिन व्रत तथा पूजा अर्चना करना चाहिए। इसके अलावा जिन महिलाओं का विवाह हो चुका है उनको संयुक्त रूप से भगवान शिव और पार्वती की उपासना करनी चाहिए।

TRP परिवार की ओर से सभी बहनो और माताओ की तीज की शुभकामनाएँ।

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