रायपुर। छत्तीसगढ़ के दल्लीराजहरा क्षेत्र स्थित राजहरा कोकान माइंस (Rajhara Mines) के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। इलाके के जमुरवा गांव समेत आसपास के इलाकों के ग्रामीण बड़ी संख्या में पहाड़ी माइंस तक पहुंचकर धरने पर बैठ गए। दल्ली राजहरा की ये माइंस सेल के भिलाई इस्पात संयंत्र की आयरन ओर माइंस है।
ये सभी ग्रामीण साल्हे पंचायत की सरपंच संगीता नेताम के नेतृत्व में जंगल के रास्ते माइंस क्षेत्र तक पहुंचे और माइनिंग प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया। ग्रामीणों का आरोप है कि माइनिंग कंपनी द्वारा ग्राम पंचायत साल्हे के आश्रित ग्राम जमुरवा की जमीन पर वेस्ट मटेरियल (डस्ट) डाला जा रहा है। इससे खेती को भारी नुकसान हो रहा है और आसपास का पर्यावरण भी प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि धूल और अपशिष्ट के कारण फसलें खराब हो रही हैं और जीवन यापन मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि करीब 12 गांवों की आस्था का केंद्र ‘राजाराव बाबा’ देवस्थल को भी माइंस के ठेकेदार द्वारा वेस्ट मटेरियल से दबाया जा रहा है। इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और आक्रोश बढ़ गया है।
बताया जा रहा है कि कोकान माइंस का ठेका देव माइनिंग कंपनी के पास है, जिस पर यह आरोप लगाए गए हैं। भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर धरने पर डट गए। मौके पर भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के अधिकारी, पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की।
ग्रामीणों की मांग है कि माइंस में डस्ट डालने पर तत्काल रोक लगाई जाए और हुए नुकसान की भरपाई की जाए। फिलहाल प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद इलाके में माहौल गरमाया हुआ है और स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।



