रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में आज उस वक्त भूचाल आ गया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने धमतरी के कुरूद में दस्तक दी। चर्चित भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाले की जांच अब पूर्व मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता अजय चंद्राकर के घर की दहलीज तक पहुंच गई है।
सोमवार तड़के जब कुरूद सो रहा था, तब 12 से ज्यादा अधिकारियों की टीम ने अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर के ठिकानों पर धावा बोल दिया। इस कार्रवाई ने पूरे प्रदेश के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है।
कुरूद से मिल रही जानकारी के मुताबिक, ईडी की टीम चार इनोवा गाड़ियों में सवार होकर पहुंची थी। जांच के घेरे में केवल भूपेंद्र चंद्राकर ही नहीं, बल्कि पूर्व राइस मिल एसोसिएशन अध्यक्ष रोशन चंद्राकर का नाम भी सामने आ रहा है। सूत्रों का कहना है कि भारतमाला परियोजना में जमीनों के मुआवजे में करोड़ों की हेरफेर और फर्जीवाड़े के पुख्ता इनपुट मिलने के बाद यह एक्शन लिया गया है। अधिकारी घर के अंदर दस्तावेजों और बैंक ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच कर रहे हैं।
पीसीसी चीफ दीपक बैज का बड़ा सवाल
इस छापेमारी के तुरंत बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार और जांच एजेंसी पर तीखा हमला बोला है। बैज ने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि क्या यह जांच केवल भाई तक सीमित है या इसका असली सिरा अजय चंद्राकर से जुड़ा है? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के भीतर ही अपने उन वरिष्ठ नेताओं को कमजोर करने का खेल चल रहा है, जो विधानसभा में अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर होकर बोलते हैं।
12 साल का टूटा रिकॉर्ड, विपक्ष ने बताया ‘सियासी एजेंडा’
दीपक बैज ने दावा किया कि पिछले 12 सालों में यह पहली बार है जब ईडी की आंच किसी भाजपा नेता के परिवार तक पहुंची है। उन्होंने इसे एक खास पैटर्न बताते हुए कहा पहले कार्रवाई करो, फिर डराकर या कमजोर कर राजनीतिक फायदा उठाओ। विपक्षी नेताओं को पार्टी में शामिल कर क्लीन चिट देने का जो चलन है, वैसा ही कुछ यहां भी दिख रहा है।कांग्रेस का दावा है कि यह घोटाला 350 करोड़ से भी ज्यादा का हो सकता है।
कुरूद के चौक-चौराहों पर चर्चा, क्या और बढ़ेंगे छापे?
धमतरी और रायपुर के राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा तेज है कि ईडी की लिस्ट में अभी कई और बड़े नाम शामिल हैं। कुरूद में हुई इस कार्रवाई को भारतमाला घोटाले की सबसे बड़ी कड़ियों में से एक माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि दस्तावेजों की इस पड़ताल में क्या अजय चंद्राकर की मुश्किलें बढ़ेंगी या यह जांच भूपेंद्र चंद्राकर तक ही सिमट कर रह जाएगी।



