Digital Arrest WhatsApp Ban: देश में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर मची लूट खसोट के खिलाफ सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा डंडा चला दिया है। गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर ठगों की कमर तोड़ दी है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले WhatsApp ने ही देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय करीब 9,400 संदिग्ध अकाउंट्स को हमेशा के लिए बैन कर दिया है। ये वो नंबर थे जिनका इस्तेमाल मासूम लोगों को डराने और पुलिस बनकर पैसे ऐंठने के लिए किया जा रहा था।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद प्रशासन ने कसी कमर
दरअसल, यह पूरी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद शुरू हुई है। कोर्ट ने साफ कह दिया था कि ऑनलाइन ठगी और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों पर रोक लगाने के लिए एजेंसियों को अपनी पुरानी सुस्ती छोड़नी होगी। इसी के बाद गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने पूरा एक्शन प्लान तैयार किया। अब आलम यह है कि सरकारी या पुलिस की फोटो लगाकर ठगी करने वालों को WhatsApp का ऑटोमेटेड सिस्टम खुद-ब-खुद डिटेक्ट कर ब्लॉक कर रहा है।
अब 3 घंटे में बंद होगा फर्जी सिम, बायोमेट्रिक का नया नियम
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अब ठगों के लिए फर्जी सिम जुगाड़ना नामुमकिन होने वाला है। दूरसंचार विभाग (DoT) और टेलीकॉम कंपनियों ने मिलकर नया सिस्टम तैयार किया है। इसके तहत किसी भी संदिग्ध सिम की शिकायत मिलते ही उसे 2 से 3 घंटे के भीतर ब्लॉक कर दिया जाएगा। सिम लेने की प्रक्रिया में अब कड़ा बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। सरकार दिसंबर 2026 तक बायोमेट्रिक आधारित सिम सिस्टम पूरे देश में लागू करने की तैयारी में है। WhatsApp में भी अब सिम-बाइंडिंग फीचर लाने पर विचार हो रहा है, ताकि एक नंबर से एक ही ऑथेंटिक फोन चले।
10 करोड़ से ऊपर की ठगी की जांच करेगी CBI
डिजिटल अरेस्ट के मकड़जाल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों में करोड़ों की ठगी के मामले सामने आए हैं। एक केस में तो ₹22.92 करोड़ की चपत लगाई गई थी। अब केंद्र सरकार ने फैसला लिया है कि ₹10 करोड़ से अधिक के जितने भी बड़े घोटाले होंगे, उनकी जांच सीधे CBI करेगी। साथ ही, RBI ने भी बैंकों को निर्देश दे दिए हैं कि किसी भी संदिग्ध ट्रांजेक्शन पर तुरंत अस्थायी रोक लगा दी जाए।
ध्यान रखें ये बातें
- अगर कोई खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर अरेस्ट करने की धमकी दे, तो तुरंत कॉल काटें।
- पुलिस कभी भी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या पैसों की मांग नहीं करती।
- अनजान नंबर से आने वाली कॉल पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें।
- साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।


