टीआरपी डेस्क। आज 1 मई की सुबह आम आदमी के लिए महंगाई के एक बड़े झटके के साथ हुई है। विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि, सिलेंडर का महंगा होना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह रोटी और थाली को महंगा करना है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि महंगाई का दर्द वही समझता है जो खुद खरीदकर खाता है। ₹1000 में ₹7 कम करने को उन्होंने दिखावटी एहसान करार दिया।
कांग्रेस का महंगाई मैन तंज
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री को महंगाई मैन मोदी कहते हुए आंकड़ों की झड़ी लगा दी। उनका दावा है कि पिछले 4 महीनों में ही कमर्शियल सिलेंडर के दाम ₹1,518 तक बढ़ चुके हैं।
1 मई 2026 की सुबह से ही गैस सिलेंडरों के दामों में हुई भारी बढ़ोतरी ने न केवल व्यापारियों बल्कि राजनीतिक हलकों में भी हड़कंप मचा दिया है। दिल्ली में कमर्शियल और छोटू सिलेंडर की कीमतों में आई यह उछाल अब तक की सबसे बड़ी वृद्धियों में से एक मानी जा रही है।
19 किग्रा कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी
सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) द्वारा जारी की गई नई दरों के अनुसार, 19 किग्रा कमर्शियल सिलेंडर जिसकी कीमत में 993 की भारी बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में अब यह 3,071.50 रुपए का मिलेगा। छोटे व्यापारियों और छात्रों के बीच लोकप्रिय पांच किलोग्राम सिलेंडर के दाम में 261 का इजाफा हुआ है। दिल्ली में अब इसकी कीमत लगभग 339 रुपए के आसपास पहुंच गई है। राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई गैस की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में इसकी कीमत अभी भी 913 रुपए बनी हुई है।
कमर्शियल गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय हालात हैं। पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके अलावा हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का करीब 20% तेल और गैस गुजरता है, जहां बाधा आने से कीमतें बढ़ गई हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में थोड़ी सी भी बढ़त का असर सीधे देश में दिखता है।
खाने-पीने की चीजें हो सकती हैं महंगी
कमर्शियल गैस महंगी होने का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और बेकरी में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। सड़क किनारे चाय-नाश्ता बेचने वालों की लागत भी बढ़ेगी, जिसका बोझ आखिरकार ग्राहकों को ही उठाना पड़ेगा। यानी बाहर खाना और रोजमर्रा के छोटे खर्च भी अब महंगे हो सकते हैं।



