बिलासपुर। जनगणना कार्य के दौरान सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने का मामला फिर सामने आया है। बिलासपुर जिले में बिल्हा क्षेत्र की घटना के बाद अब तखतपुर विकासखंड के अंतर्गत ग्राम देवरीकला में हुई इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और मैदानी अमले की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इधर लगातार हो रही मारपीट की घटनाओं को लेकर जनगणना कार्य निदेशालय ने सख्ती दिखाई है।

मिली जानकारी के मुताबिक, जनगणना कार्य के तहत “गुरुजी” (शिक्षक) के साथ कोटवार नकुल दास गांव में सर्वे के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान सरपंच पति शत्रुघन सूर्यवंशी अपने बेटे और भतीजे के साथ मौके पर पहुंचा और विवाद करते हुए कोटवार के साथ जमकर मारपीट की। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आरोपियों ने कोटवार को बेरहमी से पीटा, जिससे वह घायल हो गया और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं

इस घटना के बाद पीड़ित कोटवार नकुल दास ने तत्काल सकरी थाना पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई और आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। बावजूद इसके, खबर लिखे जाने तक आरोपियों पर  कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। यह घटना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि सरकारी कार्य में सीधा हस्तक्षेप और शासन-प्रशासन के अधिकारों को चुनौती देने जैसा है। जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में लगे कर्मचारियों के साथ यदि इस प्रकार की घटनाएं होती रहीं, तो यह कार्य बाधित होना तय है। इससे न केवल शासन की योजनाओं पर असर पड़ेगा, बल्कि मैदानी कर्मचारियों का मनोबल भी टूटेगा।

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स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति सरकारी कार्य में बाधा डालने का दुस्साहस न कर सके। साथ ही, जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की भी मांग की गई है।

जनगणना ड्यूटी के दौरान मारपीट पर कलेक्टर को FIR के निर्देश

छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 के कार्य में लगे शिक्षकों से मारपीट पर अब जनगणना कार्य निदेशालय सख्त हो गया है। सभी कलेक्टरों को निदेशालय ने निर्देशित किया है कि वो कर्मियों से मारपीट और दुर्व्यवहार के मामले में तत्काल FIR दर्ज करें। 

जनगणना कर्मी ‘लोक सेवक’ के दायरे में

निदेशालय ने अपने पत्र में जनगणना अधिनियम, 1948 का हवाला देते हुए बताया कि जनगणना कार्य में लगे सभी अधिकारी और कर्मचारी भारतीय दंड संहिता के तहत ‘लोक सेवक’ की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में उनके साथ मारपीट या कार्य में बाधा डालना एक गंभीर अपराध माना जाएगा।

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कानूनी कार्रवाई के निर्देश

पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अधिनियम की धारा 11 के तहत जो भी व्यक्ति जनगणना कार्य में बाधा उत्पन्न करेगा, वह दंडनीय होगा। इसी आधार पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने और मारपीट के आरोप में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।

अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर मामले में कितनी तत्परता दिखाता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है। यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई, तो ऐसे घटनाक्रम आगे भी दोहराए जा सकते हैं।