टीआरपी। रायपुर नगर निगम में स्वच्छता की कमान संभालने वाली 150 स्वच्छता दीदियों को पिछले 4 महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इस मुद्दे को लेकर आक्रोशित दीदियों के प्रतिनिधिमंडल ने नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई और जल्द भुगतान की मांग की।
राजधानी रायपुर में एक ओर स्वच्छता सर्वेक्षण चल रहा है, वहीं दूसरी ओर स्वच्छता के आधार स्तंभ कही जाने वाली महिलाओं को मानदेय न मिलना नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है। यह स्थिति न केवल शहर की सफाई व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है, बल्कि शासन की ‘महतारी वंदन’ जैसी महिला सशक्तिकरण योजनाओं के दावों पर भी धरातल पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
वेतन की आस में स्वच्छता दीदियां: धरातल पर हकीकत
स्वच्छता दीदियों ने बताया कि वे सूखा और गीला कचरा अलग करने से लेकर राजस्व वसूली तक के कार्यों में नगर निगम का पूरा सहयोग करती हैं। इसके बावजूद, उन्हें अपने हक के वेतन के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है। दीदियों के अनुसार, उन्होंने महापौर से भी कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।
इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इसे ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार की महिला सशक्तिकरण नीति की विफलता बताया। उन्होंने कहा कि एक तरफ महिलाओं के लिए विशेष सत्र बुलाए जाते हैं और दूसरी तरफ मेहनत करने वाली दीदियों को वेतन के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
मुख्य तथ्य
प्रभावित कर्मचारी: रायपुर नगर निगम की लगभग 150 स्वच्छता दीदियां।
लंबित अवधि: पिछले 4 महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है।
प्रमुख मांग: दिवाली और अन्य खर्चों के बीच रुके हुए वेतन का तत्काल भुगतान।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल: कनिका हालदार, सीरत परवीन, सपना दास, हेमा बंजारे, सोनाली साहू समेत अन्य दीदियां उपस्थित रहीं।
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने जिम्मेदार अधिकारियों से चर्चा कर समस्या के तत्काल निराकरण का आश्वासन दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि समय पर वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो स्वच्छता दीदियों के हक के लिए उग्र आंदोलन और लड़ाई लड़ी जाएगी।


