केरल विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल यानी आरजेडी ने पहली बार जीत दर्ज की है। पार्टी के उम्मीदवार पीके प्रवीन ने कुथुपरम्बा सीट से जीत हासिल की। आरजेडी की यह जीत इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पार्टी की पहचान अब तक मुख्य तौर पर बिहार की राजनीति से जुड़ी रही है।

चुनाव आयोग के अनुसार, पीके प्रवीन ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग यानी आईयूएमएल की उम्मीदवार जयंती राजन को 1286 वोटों से हराया। प्रवीन को कुल 70,448 वोट मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार सिजीलाल तीसरे स्थान पर 22,195 वोट मिले।

एलडीएफ का सहयोगी दल है आरजेडी

आरजेडी, वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चा यानी एलडीएफ़ का सहयोगी दल है। इसी गठबंधन के तहत पार्टी ने इस चुनाव में तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। इनमें आरजेडी को कुथुपरम्बा सीट पर जीत मिली, जबकि बाकी दो सीटों पर पार्टी दूसरे नंबर पर रही

पीके प्रवीन कारोबारी हैं और उन्होंने अन्नामलाई यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन और एम फिल की पढ़ाई की है। नूहचुनावी हलफ़नामे के मुताबिक़, प्रवीन के पास सवा तीन करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है। इसमें 1.33 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 2.05 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है।

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उन पर करीब 15 लाख रुपये की देनदारी भी है। हलफ़नामें के मुताबिक उनके ख़िलाफ़ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि साफ़ छवि और शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने मतदाताओं के बीच उनका भरोसा बनाने में मदद की।

बता दें कि इस चुनाव में बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी एलडीएफ़ के समर्थन में प्रचार किया था।

16 मार्च को पटना में उन्होंने कहा था, “केरल में हमारी पार्टी एलडीएफ़ के हिस्से के तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ रही है। अतीत में भी हमारी पार्टी की केरल विधानसभा में मौजूदगी रही है  हमें उम्मीद है कि हम राज्य में एलडीएफ़ को सत्ता बरकरार रखने में मदद करेंगे।”

केरल की राजनीति में कांग्रेस और सीपीएम लंबे समय से एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। हालांकि बिहार में यही दोनों दल महागठबंधन के तहत साथ थे। आरजेडी इससे पहले भी केरल में स्थानीय निकाय चुनावों में कुछ सीटें जीत चुकी है।

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पिछले साल दिसंबर में हुए केरल के लोकल बॉडी इलेक्शन में आरजेडी ने कुल 63 सीटें जीती थीं। 2021 विधानसभा चुनाव में पार्टी ने वायनाड की कल्पेट्टा, कोझिकोड की वडकारा और कन्नूर की कुथुपरम्बा सीट पर चुनाव लड़ा था।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि केरल जैसे राज्य में आरजेडी की यह जीत प्रतीकात्मक रूप से अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे पार्टी को बिहार से बाहर अपनी मौजूदगी दिखाने का मौका मिला है। ये इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनावों में उसे करारी हार का सामना करना पड़ा था।

140 सदस्यों वाली केरल विधानसभा के चुनावों में कांग्रेस को सबसे अधिक 63 सीटें मिली हैं, सीपीएम 26 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को 22 सीटों पर सफलता मिली है।