टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ में इन दिनों सियासी पारा हाई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 19 मई को बस्तर के दौरे पर पहुंच रहे हैं। वे यहां जगदलपुर में होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद की हाई-लेवल मीटिंग लेंगे। इस बैठक में छत्तीसगढ़ समेत 4 राज्यों के मुख्यमंत्री एक ही टेबल पर बैठेंगे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने इसे राज्य के लिए बड़ा मौका बताया है।

जगदलपुर में होने वाली यह बैठक कई मायनों में खास है। डॉ. रमन सिंह का कहना है कि इस मीटिंग से छत्तीसगढ़ के विकास की नई राह खुलेगी। दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री भी अपनी आंखों से देखेंगे कि बस्तर अब बदल रहा है। जो लोग नक्सलवाद का खात्मा नामुमकिन मानते थे, आज वे अपनी आंखों से बदलाव देख रहे हैं। बस्तर अब डर का नहीं, बल्कि विकास का चेहरा बन रहा है।

सोना और तेल बचाने की अपील पर तेज हुई बहस

विवाद की शुरुआत पीएम मोदी की उस अपील से हुई, जिसमें उन्होंने देशहित में तेल बचाने और साल भर शादियों के लिए सोना न खरीदने की बात कही थी। राहुल गांधी ने इस पर तंज कसते हुए इसे सरकार की ‘नाकामी’ करार दिया। बस फिर क्या था, रमन सिंह ने भी मोर्चा संभाल लिया। डॉ. रमन सिंह ने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि राहुल गांधी मानसिक रूप से अभी मैच्योर नहीं हुए हैं। उन्हें समझना चाहिए कि देश का 90% सोना बाहर से आता है, जिससे विदेशी पैसा खर्च होता है। पीएम की अपील देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए है।

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शास्त्री जी के वक्त राहुल होते तो…

रमन सिंह यहीं नहीं रुके। उन्होंने पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण देते हुए कहा कि जब शास्त्री जी ने देश के लिए एक वक्त का खाना छोड़ने की अपील की थी, अगर राहुल गांधी उस वक्त होते तो शायद उनकी भी आलोचना करते। रमन सिंह को भरोसा है कि देश की जनता पीएम मोदी की बात जरूर मानेगी और इसका बड़ा असर देखने को मिलेगा।

अमित शाह के दौरे को लेकर बस्तर में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। जगदलपुर के चप्पे-चप्पे पर पहरा बिठा दिया गया है। सूत्रों की मानें तो इस बैठक में अंतर्राज्यीय सीमा विवाद और माओवाद जैसे गंभीर मुद्दों पर भी मुहर लग सकती है।