नई दिल्ली: नीट-यूजी 2026 (NEET-UG 2026) को लेकर मचा बवाल अब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। डॉक्टरों के बड़े संगठन ‘फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन’ (FAIMA) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं। डॉक्टरों की मांग है कि या तो एनटीए को पूरी तरह बदल दिया जाए या इसमें बड़ा सुधार किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में हो दोबारा परीक्षा
वकील तन्वी दुबे के जरिए दायर इस याचिका में साफ कहा गया है कि नीट-यूजी 2026 की परीक्षा फिर से आयोजित की जानी चाहिए। लेकिन इस बार यह परीक्षा एनटीए के भरोसे नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में बनी एक हाई-लेवल कमेटी की देखरेख में होनी चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक कोई नई और सुरक्षित संस्था नहीं बन जाती, तब तक एक स्वतंत्र कमेटी ही परीक्षा कराए।
डिजिटल लॉक और कंप्यूटर टेस्ट की मांग
याचिका में भविष्य के लिए भी सुझाव दिए गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अब पेपर लीक रोकने के लिए ‘कंप्यूटर आधारित टेस्ट’ (CBT) मॉडल अपनाना जरूरी है। इससे फिजिकल पेपर को इधर-उधर ले जाने का जोखिम खत्म हो जाएगा। साथ ही, पेपर को डिजिटल रूप से लॉक करने की तकनीक भी इस्तेमाल होनी चाहिए।
सीबीआई से मांगी चार हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट
FAIMA ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि वह सीबीआई को निर्देश दे कि अगले चार हफ्तों के भीतर जांच की प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश की जाए। इस रिपोर्ट में यह साफ होना चाहिए कि अब तक कितनी गिरफ्तारियां हुई हैं, कौन-कौन से नेटवर्क पकड़े गए हैं और जांच कहां तक पहुंची है। साथ ही, पारदर्शिता के लिए हर सेंटर के नतीजे सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है।
क्या था पूरा विवाद?
बता दें कि 3 मई को हुई नीट परीक्षा के बाद पेपर लीक के गंभीर आरोप लगे थे। व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर वायरल हुए कुछ सवालों के असली पेपर से मेल खाने के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी थी। फिलहाल मामला सीबीआई के पास है, लेकिन लाखों छात्रों का भविष्य अब कोर्ट के फैसले पर टिका है।



