बिलासपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन में हुए रीजेंट खरीदी घोटाले में मोक्षित कॉर्पोरेशन के संचालक और मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल शशांक चोपड़ा को हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है। आरोपी की ओर से स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए राहत की मांग की गई थी।

इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि शशांक चोपड़ा का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है और वह जनवरी 2025 से लगातार जेल में बंद हैं। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है तथा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा अभियोजन शिकायत भी अदालत में प्रस्तुत की जा चुकी है।

ED ने जमानत का किया विरोध

इधर ईडी की ओर से जमानत आवेदन का विरोध किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है और मामले की सुनवाई पूरी होने में अभी काफी समय लग सकता है। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि इस प्रकरण के मूल मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही जमानत दे चुका है। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं माना और जमानत मंजूर कर दी।

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गौरतलब है कि शशांक चोपड़ा को इससे पहले CGMSC घोटाले में भी सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल चुकी है। अब ईडी प्रकरण में जमानत मिलने के बाद तीनों एजेंसियों द्वारा दर्ज मामलों में उन्हें राहत प्राप्त हो गई है।

बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दर पर आपूर्ति

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन से जुड़ा यह मामला सरकारी अस्पतालों के लिए मेडिकल उपकरणों और रीएजेंट की खरीदी में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित है। आरोप है कि कुछ कंपनियों ने अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर निविदा प्रक्रिया में हेरफेर की और बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दर पर सामग्री की आपूर्ति की। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचने का दावा जांच एजेंसियों ने किया है।

इस मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अलग-अलग पहलुओं से कर रहे हैं। घोटाले को लेकर पूर्व में कई अधिकारियों और कारोबारी समूहों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।

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