टीआरपी। केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने रायपुर प्रवास के दौरान राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण विकास योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। मंत्री ने न केवल विभागीय कामकाज की सराहना की, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी जारी किए।
यह समीक्षा बैठक छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। केंद्रीय मंत्री द्वारा मनरेगा के ‘क्यूआर कोड’ नवाचार और ‘छत्तीसकला’ ब्रांड को बढ़ावा देने की बात करने से स्थानीय स्व-सहायता समूहों (SHG) की आय में इजाफा होने की प्रबल संभावना है, जो सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगा।
समीक्षा बैठक में पासवान ने महात्मा गांधी नरेगा (मनरेगा) में छत्तीसगढ़ के प्रदर्शन को देश में अग्रणी बताया। उन्होंने ‘मोर गांव मोर पानी’ जल संरक्षण महाभियान की तारीफ करते हुए कहा कि राज्य के नवाचार अन्य राज्यों के लिए प्रेरणादायक हैं।
मंत्री ने ‘छत्तीसकला’ ब्रांड के उत्पादों को बाजार दिलाने के लिए एक ठोस कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि इन उत्पादों को मॉल, रेलवे स्टेशन और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर स्टॉल लगाकर आम जनता तक पहुंचाया जाए। इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना, एनआरएलएम और दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना की प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
प्रमुख नवाचार: मनरेगा कार्यों में क्यूआर कोड तकनीक।
स्व-सहायता समूह: ‘छत्तीसकला’ ब्रांड को बड़े बाजार (मॉल/स्टेशन) से जोड़ने का निर्देश।
प्रमुख योजनाएं: मनरेगा, पीएम आवास योजना, मोर गांव मोर पानी, एनआरएलएम।
उपस्थिति: अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, सचिव भीम सिंह, और अन्य विभागीय अधिकारी।
केंद्रीय मंत्री के दिशा-निर्देशों के बाद अब विभाग ‘छत्तीसकला’ उत्पादों के लिए सार्वजनिक स्थानों पर विशेष स्टॉल लगाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। साथ ही, मनरेगा और आवास योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नवाचारों को और अधिक गति दी जाएगी।


