टीआरपी डेस्क। भारत में डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले 25 लाख छात्र हर साल नीट (NEET) परीक्षा देते हैं। लेकिन अफसोस, हर साल पेपर लीक और धांधली की खबरें सामने आ जाती हैं। वहीं दूसरी तरफ हमारा पड़ोसी देश चीन है। वहां की Gaokao परीक्षा में 1 करोड़ 30 लाख बच्चे बैठते हैं, फिर भी वहां पेपर लीक का नामोनिशान नहीं मिलता।
आखिर चीन ऐसा क्या करता है जो हम नहीं कर पा रहे?
भारत में नीट सिर्फ डॉक्टर बनने के लिए है। चीन में गाओकाओ का मतलब सब कुछ है। वहां कॉलेज में घुसने का इकलौता रास्ता यही परीक्षा है। साल में सिर्फ एक बार होने वाला यह एग्जाम तय करता है कि बच्चा क्या बनेगा। परीक्षा के दिन आलम यह रहता है कि परीक्षा के दिन पूरा शहर थम जाता है।
आसमान में ड्रोन और जमीन पर जैमर
चीन में नकल करना नामुमकिन जैसा है। एग्जाम सेंटर्स पर एआई (AI) कैमरे लगे होते हैं जो पलक झपकते ही संदिग्ध हरकत पकड़ लेते हैं। वहां केवल बायोमेट्रिक अटेंडेंस होती है। सेंटर्स के आसपास सिग्नल जैमर लगा दिए जाते हैं ताकि कोई मोबाइल न चल सके। इतना ही नहीं, एग्जाम हॉल के बाहर ड्रोन से निगरानी की जाती है। पेपर लाने और ले जाने का सुरक्षा घेरा ऐसा है जिसे परिंदा भी पर नहीं मार सकता।
परीक्षा के लिए रुक जाता है पूरा देश
चीन के शहरों में परीक्षा के दिन हॉर्न बजाना मना है। अगर कोई सेंटर के पास शोर मचाता है, तो पुलिस उसे तुरंत उठा लेती है। छात्रों को सेंटर तक पहुंचने में देरी न हो, इसके लिए ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया जाता है। भारत में जहां पेपर लीक होने के बाद जांच (Investigation) शुरू होती है, चीन में लीक रोकने के लिए पहले ही जंग जैसा इंतजाम कर दिया जाता है।



