रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी के डीडी नगर सेक्टर-4 में पिछले 4 दिनों से बना सस्पेंस अब खत्म हो गया है। एनजीओ संचालक माणिक मेहता की मौत कैसे हुई, इसे लेकर इलाके में कई तरह की चर्चाएं थीं। लेकिन डॉक्टरों की टीम ने जो शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को दी है, उसने सारी कयासबाजियों पर विराम लगा दिया है। माणिक मेहता की मौत किसी साजिश का नतीजा नहीं, बल्कि हार्ट अटैक से हुई है।

किचन में मिली थी लाश

माणिक मेहता अपने घर में अकेले ही रहते थे। उनके पिता बी.डी. मेहता का इलाके में काफी नाम था, उनके जाने के बाद माणिक ही घर और एनजीओ की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अचानक घर के किचन में उनका शव मिलने से हड़कंप मच गया था। पुलिस ने जब मौका-मुआयना किया तो शुरुआती तौर पर कुछ भी संदिग्ध नहीं लगा। अब डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि उनकी मौत हार्ट फेल होने की वजह से हुई है। अचानक आए हार्ट अटैक ने उन्हें संभलने तक का मौका नहीं दिया।

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दुबई से पहुंची बहन

माणिक का इस दुनिया में अपना कहने वाला कोई खास बचा नहीं था। जैसे ही उनकी मौत की खबर दुबई में रहने वाली उनकी बहन को मिली, वह फौरन रायपुर के लिए रवाना हुईं। भाई को अंतिम विदाई देने जब वह श्मशान पहुंचीं, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। दुबई से आई बहन ने ही अपने भाई की तमाम अंतिम रस्में पूरी कीं और उन्हें मुखाग्नि दी। एक अकेला भाई और उसे विदा करने सात समंदर पार से आई बहन, यह मंजर देख हर कोई भावुक था।

समाज सेवा में रहते थे आगे

माणिक मेहता रायपुर के सामाजिक हलकों में एक पहचाना हुआ नाम थे। वे एनजीओ के जरिए जरूरतमंदों की मदद करते थे। डीडी नगर के उनके पड़ोसियों का कहना है कि वे बहुत ही शांत स्वभाव के थे और कभी किसी से उनका कोई विवाद नहीं हुआ।