टीआरपी। भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेन्द्र भूषण ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील से सौजन्य भेंट कर राज्य में चल रहे डिजिटल राजस्व सुधारों और सिंचाई परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। इस बैठक में ई-पंजीयन, भुईयां पोर्टल और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत हो रहे नवाचारों पर केंद्र ने संतोष व्यक्त किया है।
छत्तीसगढ़ के किसानों और आम जनता के लिए राजस्व संबंधी कार्यों में पारदर्शिता और गति आएगी। अब रजिस्ट्री की प्रति व्हाट्सएप पर मिलना और डिजिटल किसान किताब जैसी सुविधाएं आम नागरिकों को तहसील और दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाएंगी।
मामले का विवरण
बैठक के दौरान राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने बताया कि राज्य में भू-अभिलेखों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण कर मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्थापित किए जा चुके हैं। भुईयां पोर्टल के माध्यम से अब भूमि स्वामी अपनी डिजिटल किसान किताब कभी भी डाउनलोड कर सकते हैं। इसके अलावा, वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग ने रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस बना दिया है, जिसमें अपॉइंटमेंट से लेकर दस्तावेज प्राप्ति तक की सूचना व्हाट्सएप पर दी जा रही है।
जलग्रहण प्रबंधन पर चर्चा करते हुए बताया गया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (WDC 2.0) के तहत 27 जिलों के 387 माइक्रो वाटरशेड में कार्य प्रगति पर है। भारत सरकार ने इस महत्वपूर्ण परियोजना की अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी है, साथ ही 30.14 करोड़ रुपये की किश्त भी जारी कर दी है। इससे प्रदेश के 2.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा।
मुख्य तथ्य
सिंचाई परियोजना की लागत 613.66 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र और राज्य का हिस्सा 60:40 के अनुपात में है।
केंद्र सरकार ने हाल ही में 28 अप्रैल 2026 को परियोजना के लिए 30.14 करोड़ रुपये का केंद्रांश जारी किया है।
डिजिटल सुधारों और केंद्र से मिली नई किश्त के बाद प्रदेश में लंबित सिंचाई कार्यों में तेजी आएगी। साथ ही, राजस्व विभाग जल्द ही कुछ अन्य सेवाओं को भी पूरी तरह ऑनलाइन और मोबाइल-फ्रेंडली बनाने की तैयारी में है।


