आरटीई प्रवेश प्रक्रिया शुरू, छह मार्च से 10 अप्रैल तक होगा पंजीयन



बिलासपुर। शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों को मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी को अवमानना नोटिस जारी किया है। अदालत ने तीन सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने प्रतिपूर्ति राशि को लेकर पूर्व में दिया था फैसला

दरअसल निजी स्कूल प्रबंधन एसोसिएशन द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने 19 सितंबर 2025 को राज्य सरकार को प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने के विषय पर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक उस आदेश का पालन नहीं किया गया। इसे अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना बताया गया है।

न्यायमूर्ति पी.पी. साहू की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्कूल शिक्षा सचिव को नोटिस जारी किया। अदालत ने पूछा है कि पूर्व आदेश के पालन में अब तक क्या कार्रवाई की गई।

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निजी स्कूल प्रबंधन ने क्या कहा..?

याचिका में बिलासपुर निजी स्कूल प्रबंधन ने कहा है कि वर्ष 2011 से अब तक आरटीई के तहत प्रति छात्र केवल 7 हजार रुपए की प्रतिपूर्ति दी जा रही है। पिछले 14 वर्षों में इस राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई, जबकि शिक्षा संचालन की लागत लगातार बढ़ी है। प्रबंधन का दावा है कि अन्य राज्यों में यह राशि छत्तीसगढ़ की तुलना में काफी अधिक है।

निजी स्कूलों का असहयोग आंदोलन जारी

इधर, हाईकोर्ट के आदेश के पालन की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ निजी स्कूल प्रबंधन संघ ने 1 मार्च 2026 से असहयोग आंदोलन शुरू कर रखा है। आंदोलन के तहत निजी स्कूल शासन के पत्रों और नोटिसों का जवाब नहीं दे रहे हैं। साथ ही आरटीई के अंतर्गत नए प्रवेश नहीं देने का निर्णय भी लिया गया है।

निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि वर्तमान प्रतिपूर्ति राशि में स्कूलों का संचालन करना मुश्किल हो रहा है। उनका आरोप है कि लंबे समय से मांग किए जाने के बावजूद सरकार इस विषय पर कोई ठोस फैसला नहीं ले रही।

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