अमेरिका से भारत आ रही 19 करोड़ की चोरी हुई दुर्लभ प्रतिमा

टीआरपी। विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी एक बड़ी और गौरवपूर्ण खबर सामने आई है, जहां रायपुर स्थित महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय से चोरी हुई भगवान अवलोकितेश्वर की दुर्लभ कांस्य प्रतिमा जल्द ही छत्तीसगढ़ लौटने की तैयारी में है। लगभग 19 करोड़ रुपये मूल्य की यह ऐतिहासिक और बहुमूल्य प्रतिमा अमेरिका से भारत लाई जा रही है, जिसे पुनः स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने सक्रिय औपचारिक पहल शुरू कर दी है।

यह प्रतिमा छत्तीसगढ़ की समृद्ध बौद्ध परंपरा, प्राचीन शिल्पकला और महासमुंद जिले के विश्वविख्यात पुरातात्विक स्थल सिरपुर की सांस्कृतिक पहचान का जीवंत प्रतीक है। इसकी वापसी से न केवल प्रदेश की खोई हुई सांस्कृतिक विरासत पुनः स्थापित होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिरपुर की ऐतिहासिक पहचान को एक नई प्रतिष्ठा मिलेगी।

सिरपुर की गौरवशाली विरासत की प्रतीक है यह प्रतिमा


पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को पत्र लिखकर प्रतिमा को छत्तीसगढ़ वापस भेजने का आग्रह किया है। यह प्रतिमा वर्ष 1939 में सिरपुर स्थित लक्ष्मण मंदिर परिसर के पास मिली थी, जिस पर अंकित शिलालेख में ‘द्रौणग्रिदत्त’ नाम का उल्लेख मिलता है, जो प्राचीन श्रीपुर (वर्तमान सिरपुर) का निवासी था। रायपुर के संग्रहालय से चोरी होने के बाद यह प्रतिमा अवैध रूप से अमेरिका पहुंच गई थी। हाल ही में अमेरिका ने भारत को करीब 1.4 करोड़ डॉलर मूल्य की 657 प्राचीन कलाकृतियां लौटाई हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ की यह अमूल्य धरोहर भी शामिल है। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल प्रतिमा की रिसीविंग के लिए स्वयं दिल्ली जाने की तैयारी में हैं।

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प्रतिमा का मूल्य: अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस दुर्लभ कांस्य प्रतिमा की कीमत लगभग 19 करोड़ रुपये आंकी गई है।

ऐतिहासिक खोज: यह प्राचीन प्रतिमा वर्ष 1939 में महासमुंद जिले के ऐतिहासिक स्थल सिरपुर से प्राप्त हुई थी।

अमरीकी वापसी: अमेरिका द्वारा भारत को लौटाई जा रही 657 ऐतिहासिक कलाकृतियों के हिस्से के रूप में यह वापस आ रही है।

भारत आगमन के तुरंत बाद राज्य शासन इस प्रतिमा को रायपुर लाने और महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में सुरक्षित रूप से पुनर्स्थापित करने की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाएगा, ताकि इसे आमजन, शोधार्थियों और इतिहास प्रेमियों के अवलोकन हेतु उपलब्ध कराया जा सके।