नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के शीर्ष नेतृत्व को दिल्ली हाईकोर्ट से बहुत बड़ी राहत मिली है। अदालत ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को चुनाव लड़ने से रोकने और आप का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को सिरे से खारिज कर दिया है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की और कहा कि यह पूरी याचिका बेहद गलत सोच और खराब मंशा पर आधारित है।
क्या थे याचिका में आरोप?
अदालत में दायर इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि शराब नीति मामले (Excise Policy Case) की अदालती सुनवाई के दौरान इन नेताओं ने कोर्ट की कार्यवाही का एक तरह से बहिष्कार किया था। इसके अलावा यह भी दावा किया गया कि नेताओं ने सोशल मीडिया पर जजों के खिलाफ एक अभियान चलाया। याचिकाकर्ता का कहना था कि न्याय प्रणाली में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए इन नेताओं को चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराया जाना चाहिए और उनकी पार्टी की मान्यता रद्द होनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने कहा- मांग का कोई कानूनी आधार नहीं
इस मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि याचिका में जो भी मांगें की गई हैं, उनका कोई ठोस कानूनी आधार नहीं बनता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह जनहित याचिका सुनवाई के लायक ही नहीं है।
लोकल रिपोर्टर के मुताबिक, याचिका में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला दिया गया था। इसमें दावा किया गया था कि 27 अप्रैल 2026 को अरविंद केजरीवाल ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे आबकारी नीति मामले से जुड़ी कार्यवाही में जज के सामने न तो खुद पेश होंगे और न ही अपने वकील को भेजेंगे। बाद में मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने भी ऐसा ही किया।
आप के लिए बड़ी राजनीतिक जीत
अदालत द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद आम आदमी पार्टी के खेमे में खुशी की लहर है। पार्टी इसे अपनी एक बड़ी राजनीतिक और कानूनी जीत मान रही है। कानूनी जानकारों का भी कहना है कि किसी भी पार्टी का रजिस्ट्रेशन रद्द करना या नेताओं को चुनाव लड़ने से रोकना बेहद गंभीर मामला है और इसके लिए पुख्ता कानूनी नियम हैं, सिर्फ बयानों या मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर ऐसी मांगें अदालत में नहीं टिक सकतीं।



