टीआरपी डेस्क। एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में शुक्रवार को एक बहुत बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मामले के मुख्य आरोपी समर्थ सिंह के वकील ने कोर्ट से अपनी अग्रिम जमानत याचिका (Anticipatory Bail Plea) वापस ले ली है। वकील ने अदालत को साफ बताया कि उनका मुवक्किल अब भागने के बजाय निचली अदालत के सामने आत्मसमर्पण (Surrender) करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस फैसले के बाद अब हाई कोर्ट का पूरा ध्यान ट्विशा के दूसरे पोस्टमार्टम की मांग पर टिक गया है।

दूसरे पोस्टमार्टम पर कोर्ट में तीखी बहस, एम्स की रिपोर्ट पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत में ट्विशा शर्मा के दोबारा पोस्टमार्टम (Second Post-Mortem) को लेकर दोनों पक्षों के वकीलों के बीच भारी बहस देखने को मिली। याचिकाकर्ता के वकील ने निष्पक्ष जांच के लिए दोबारा मेडिकल जांच को बेहद जरूरी बताया।

दूसरी तरफ, ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह के वकील ने इस मांग का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि जब देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स (AIIMS) के डॉक्टर पहले ही पोस्टमार्टम कर चुके हैं, तो दूसरी जांच की क्या जरूरत है? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दोबारा जांच की मांग करना डॉक्टरों की काबिलियत और पूरी चिकित्सा बिरादरी का अपमान करने जैसा है।

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अंतिम संस्कार में न हो देरी, शव को सड़ने के लिए नहीं छोड़ सकते

गिरिबाला सिंह के वकील ने मानवीय आधार पर शव के अंतिम संस्कार (Funeral) में हो रही देरी का भी विरोध किया। उन्होंने कोर्ट से कहा कि ट्विशा उनके परिवार की बहू थी और उसका ससम्मान अंतिम संस्कार करना उनका फर्ज है। शव को इस तरह मर्चुरी में सड़ने के लिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

तुषार मेहता बोले- डॉक्टरों पर शक नहीं, लेकिन परिवार की संतुष्टि जरूरी

इस संवेदनशील मामले पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Solicitor General Tushar Mehta) ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों की ईमानदारी का बचाव किया। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि डॉक्टरों की निष्पक्षता पर कोई शक नहीं है, पर अगर पीड़ित परिवार को लगता है कि पहली जांच में कुछ छूट गया है या किसी तथ्य को नजरअंदाज किया गया है, तो दूसरी राय (Second Opinion) लेने में कोई बुराई नहीं है।

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