Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आज बहुत बड़ी खबर आई है। पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। वे पिछले दो साल से जेल की हवा खा रहे थे। अब वे बाहर तो आएंगे, लेकिन एक बड़ा पेंच फंस गया है। कोर्ट ने साफ कह दिया है कि उन्हें छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा। वे सिर्फ कोर्ट की पेशी या जांच में शामिल होने ही राज्य में आ सकेंगे।

दिल्ली से आई राहत, पर लगी कड़ी शर्त

सोमवार को देश की सबसे बड़ी अदालत में इस मामले पर लंबी बहस हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों और मनी लॉन्ड्रिंग केस में निरंजन दास को राहत दी है। दास को सितंबर और दिसंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था।

जांच एजेंसियों ने निरंजन दास को इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड बताया था। आरोप था कि उन्होंने सरकारी नीति को ऐसा घुमाया जिससे उनके साथियों को फायदा पहुंचे। हालांकि, कोर्ट ने अब उन्हें जमानत दे दी है। पर पाबंदी ऐसी है कि वे राज्य की सीमा में कदम नहीं रख पाएंगे। इससे पहले अनिल टुटेजा, एपी त्रिपाठी और सौम्या चौरसिया को भी कोर्ट से राहत मिल चुकी है। रायपुर के आबकारी दफ्तरों और राजनीतिक गलियारों में इस फैसले के बाद से ही हलचल तेज हो गई है।

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क्या है छत्तीसगढ़ का 3200 करोड़ का शराब घोटाला?

ईडी और एसीबी ने मिलकर इस पूरे मामले की परतें खोली थीं। जांच के मुताबिक, 2019 से 2022 के बीच यानी कांग्रेस सरकार के वक्त छत्तीसगढ़ में तीन तरीकों (A, B और C कैटेगरी) से इस बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया।

  • कैटेगरी A (कमीशन का खेल): शराब बनाने वाली फैक्ट्रियों से प्रति पेटी 75 से 100 रुपये तक की अवैध वसूली की गई। फैक्ट्रियों को नुकसान न हो, इसके लिए सरकारी दुकानों में शराब के दाम बढ़ा दिए गए।
  • कैटेगरी B (बिना रिकॉर्ड की शराब): नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से अवैध शराब बेची गई। इसके लिए बकायदा 15 जिलों को चुना गया था। सेल्समैन को निर्देश था कि इस कमाई का कोई रिकॉर्ड सरकारी खाते में नहीं जाना चाहिए। एसीबी को ऐसी 40 लाख से ज्यादा पेटी शराब बिकने के सबूत मिले हैं।
  • कैटेगरी C (जोन में हेरफेर): राज्य की शराब दुकानों को 8 जोन में बांटा गया था। आरोप है कि ज्यादा कमाई वाले इलाकों का टेंडर देने के लिए सिंडिकेट ने अलग से 52 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की।
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इस पूरे सिंडिकेट को चलाने का आरोप आईएएस अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर पर लगा था। अब इस मामले के मुख्य किरदारों को धीरे-धीरे जमानत मिल रही है, लेकिन कानूनी शिकंजा अभी भी कसा हुआ है।