टीआरपी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित जल जीवन मिशन लोगों का जीवन स्तर सुधारने का बड़ा माध्यम बन रहा है। जशपुर जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर जंगलों से घिरे ग्राम बेंगटा में इस योजना ने पेयजल संकट को पूरी तरह दूर कर ग्रामीणों के जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव लाया है।
यह खबर छत्तीसगढ़ के उन सुदूर और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उम्मीद की किरण है, जहां दशकों से लोग पीने के साफ पानी के लिए तरस रहे थे। बेंगटा जैसे वनांचल ग्राम में शुद्ध पेयजल पहुंचने से न सिर्फ महिलाओं को कोसों दूर पानी लेने जाने के मानसिक और शारीरिक श्रम से मुक्ति मिली है, बल्कि दूषित पानी से होने वाली गंभीर बीमारियों पर भी रोक लगी है।
हर घर जल से दूर हुई दशकों पुरानी परेशानी
भौगोलिक चुनौतियों और पथरीले रास्तों के बावजूद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) द्वारा इस गांव में 10 किलोलीटर क्षमता का उच्च स्तरीय जलागार (पानी की टंकी) स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से ग्राम की दोनों बसाहटों के सभी 61 परिवारों को अब उनके घर पर ही नियमित रूप से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।
इस योजना के लागू होने से पहले बेंगटा के ग्रामीणों को पेयजल के लिए स्थानीय नाले और कुओं पर निर्भर रहना पड़ता था। गर्मी के दिनों में जहां जलस्रोत सूख जाते थे, वहीं बरसात के मौसम में मटमैले और असुरक्षित पानी के कारण गांव में जलजनित बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहता था। अब घर पर ही नल कनेक्शन मिलने से महिलाओं और बच्चों के समय की भारी बचत हो रही है, जिससे महिलाएं अब आजीविका से जुड़ी अन्य गतिविधियों पर ध्यान दे पा रही हैं।
योजना के तहत ग्राम बेंगटा की दोनों बसाहटों के 61 परिवारों को पूर्णतः ‘हर घर जल’ से जोड़ा गया है।
गांव की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए विभाग द्वारा वहां 10 किलोलीटर क्षमता की पानी टंकी का निर्माण किया गया है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जशपुर द्वारा ग्राम बेंगटा को “हर घर जल” प्रमाणित गांव घोषित किया जा चुका है। शासन की योजना के अनुसार, आने वाले दिनों में जशपुर जिले के अन्य दूरस्थ पहाड़ी और वनांचल गांवों में भी इसी तर्ज पर सघन सर्वे कर नल कनेक्शन पहुंचाने के कार्य में तेजी लाई जाएगी।



