टीआरपी डेस्क। देश की सबसे बड़ी अदालत ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर आज सोमवार को बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि यह बड़े दुख की बात है कि पुराने मामलों से कोई सबक नहीं सीखा गया। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अफसरों के हाथ-पॉंव फूल गए हैं। दिल्ली की इस हलचल का सीधा असर छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे बड़े शहरों में दिख रहा है, जहाँ हजारों छात्र दोबारा परीक्षा होने की उम्मीद में बैठे हैं।

केंद्र सरकार को नोटिस, NTA से सीधे सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG 2026 परीक्षा में हुई धांधली को लेकर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय को नोटिस थमा दिया है। कोर्ट ने NTA से पूछा है कि उस मॉनिटरिंग कमेटी का क्या हुआ, जिसे पुराने आदेशों के बाद बनाया जाना था? अदालत ने इस मामले में चल रही ढिलाई पर गहरी नाराजगी जताई है। रायपुर के स्थानीय कोचिंग सेंटरों में सुबह से ही छात्र और उनके माता-पिता टीवी स्क्रीन पर नजरें गड़ाए बैठे हैं।

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डॉक्टरों के संगठन ने खटखटाया अदालत का दरवाजा

यह पूरी सुनवाई फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) की तरफ से दायर एक याचिका पर हो रही है। वकील तन्वी दुबे के जरिए कोर्ट पहुंची इस याचिका में NTA के काम करने के तरीके को बड़ी नाकामी बताया गया है। सूत्रों की मानें तो छत्तीसगढ़ के कई छात्र संगठनों ने भी इस मुहिम को अपना समर्थन दिया है। छात्रों का कहना है कि साल भर की मेहनत पर पानी फिरने के बाद अब वे सिर्फ कोर्ट के भरोसे हैं।

परीक्षा रद्द होने के बाद क्या हैं नई मांगें?

याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि NTA को पूरी तरह बदला जाए या फिर उसमें बड़ा फेरबदल हो। इसकी जगह किसी ऐसी मजबूत और हाईटेक संस्था को परीक्षा की जिम्मेदारी मिले जो पूरी तरह आजाद हो। जब तक नई संस्था नहीं बनती, तब तक सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की देखरेख में एक कमेटी बनाई जाए। इस कमेटी में एक साइबर एक्सपर्ट और एक फोरेंसिक साइंटिस्ट को भी शामिल करने की मांग है। यह कमेटी ही आगे होने वाली NEET परीक्षा की पूरी निगरानी करे।

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बता दें कि 3 मई को हुई परीक्षा को पहले ही रद्द किया जा चुका है और केंद्र सरकार ने इसकी पूरी जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में कोर्ट इस पर क्या अंतिम फैसला सुनाता है।