रायपुर। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप की पीएचडी डिग्री को लेकर चल रही जांच पर अब भी सवाल उठ रहे हैं। छात्र संगठन SFI का आरोप है कि समिति के तीनों सदस्य कुलसचिव के बेहद करीबी हैं, ऐसे में जांच निष्पक्ष कैसे होगी?

एक ही दिन में दो सेमेस्टर की मार्कशीट, कैसे संभव?

SFI ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का दावा है कि भूपेंद्र कुलदीप ने सीवी रमन विश्वविद्यालय से एमफिल की दोनों सेमेस्टर की अंकसूची एक ही दिन हासिल कर ली। SFI के मुताबिक प्रक्रियागत रूप से ये संभव ही नहीं है। इसके अलावा कुलदीप ने शासन और कुलपति की बिना अनुमति के पीएचडी में पंजीयन करा लिया, जो UGC और सिविल सेवा नियमों का सीधा उल्लंघन है।

22 महीने में PhD, गाइड भी अपात्र

संगठन ने कहा कि UGC के नियमों के मुताबिक PhD की न्यूनतम अवधि 36 महीने है, लेकिन कुलदीप ने महज 22 महीने में ही डिग्री पूरी कर ली। हैरानी की बात ये कि उनकी रिसर्च गाइड डॉ. लुमेश्वरी साहू खुद उस समय शोधार्थी थीं और नियमित प्राध्यापक भी नहीं थीं। UGC नियमों के तहत वो गाइड बनने की पात्र ही नहीं थीं।

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‘पहले कुलसचिव से मांगो दस्तावेज’

SFI राज्य सचिव मंडल सदस्य दुष्यंत साहू ने जांच समिति के सामने पेश होकर अभ्यावेदन सौंपा। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए सबसे पहले कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप को मूल दस्तावेजों के साथ बुलाना चाहिए था, लेकिन उल्टा शिकायतकर्ता संगठन से ही कागज मांगे जा रहे हैं।

जांच समिति पर उठाए सवाल

SFI का आरोप है कि समिति भारती विश्वविद्यालय और कुलसचिव को बचाने की कोशिश कर रही है। संयोजक डॉ. व्यास दुबे के कुलदीप से पुराने कार्यालयीन संबंध हैं। सदस्य डॉ. एस.के. गुप्ता उनके करीबी हैं और डॉ. एम.एल. नायक उनके पूर्व शिक्षक रहे हैं। ऐसे में जांच प्रभावित होना तय है।

आंदोलन की चेतावनी

SFI ने मांग की है कि पूरे मामले की सूक्ष्म और निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो। संगठन ने चेतावनी दी कि अगर जांच के नाम पर मामले को दबाया गया तो सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। कुलसचिव की डिग्री पर उठे सवालों के बाद विश्वविद्यालय में हड़कंप मचा हुआ है।

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