टीआरपी डेस्क। बिहार की सियासत में मंगलवार को बहुत बड़ा धमाका हो गया। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को सबसे बड़ा झटका देते हुए पार्टी की धाकड़ नेता और मुखिया दीदी के नाम से मशहूर रितु जायसवाल ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है।

पटना के वीरचंद पटेल पथ पर बने भाजपा प्रदेश कार्यालय में एक बड़ा मिलन समारोह रखा गया था। इसी कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दिलाई। इस दौरान नीतीश सरकार के मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल भी मंच पर मौजूद रहे। रितु जायसवाल काफी समय से लालू और तेजस्वी यादव के फैसलों से नाराज चल रही थीं। आखिरकार उन्होंने आज पाला बदल ही लिया।

क्यों टूटी रितु और तेजस्वी की जोड़ी?

बिहार विधानसभा चुनाव के समय से ही रितु जायसवाल और राजद नेतृत्व के बीच तल्खी बढ़ गई थी। रितु सीतामढ़ी की परिहार सीट से टिकट मांग रही थीं। लेकिन पार्टी ने उनका पत्ता काटकर एक वरिष्ठ नेता की बहू को मैदान में उतार दिया।

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बस यही बात रितु को चुभ गई। उन्होंने तुरंत बगावत का झंडा बुलंद किया और निर्दलीय ही चुनाव मैदान में कूद गईं। भले ही वह चुनाव हार गईं, लेकिन उन्हें करीब 64 हजार वोट मिले। इस भारी वोट ने राजद के आधिकारिक उम्मीदवार की हार तय कर दी थी। इसके बाद राजद ने अनुशासनहीनता का हवाला देकर उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

सोशल मीडिया पर पहले ही दे दिया था इशारा

बीजेपी में जाने से ठीक दो दिन पहले यानी 24 मई को रितु ने अपने इरादे साफ कर दिए थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखी थी। उन्होंने साफ कहा था कि उनके लिए राजनीति सिर्फ जनता की सेवा का एक जरिया है। रितु ने लिखा था कि देश इस समय बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। राजनीति सिर्फ दिखावे या लंबे काफिले का नाम नहीं है, यह सेवा और सही विचारधारा से जुड़ने का माध्यम है।

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सिंहवाहिनी पंचायत से पटना तक का सफर

रितु जायसवाल का राजनीतिक सफर किसी फिल्मी कहानी जैसा है। उन्होंने साल 2016 में सीतामढ़ी के सिंहवाहिनी पंचायत से मुखिया का चुनाव जीता था। वहां उन्होंने विकास के इतने काम किए कि उनकी चर्चा दिल्ली तक होने लगी।

  • 2017: उन्हें देश का आदरणीय युवा सरपंच सम्मान मिला।
  • 2018: तत्कालीन उपराष्ट्रपति ने उन्हें ‘चैंपियंस ऑफ चेंज’ का बड़ा अवॉर्ड दिया।
  • 2019: उनकी पंचायत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया।

साल 2020 में वो राजद में आईं और पार्टी ने उन्हें तुरंत महिला विंग का प्रदेश अध्यक्ष और मुख्य प्रवक्ता बना दिया। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवहर सीट से वो महज 29 हजार वोटों से हारी थीं, जिससे उनका दबदबा साबित हो गया था।

भाजपा को रितु से क्या फायदा होगा?

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि रितु जायसवाल के आने से भाजपा को मिथिलांचल और खासकर सीतामढ़ी-शिवहर के इलाके में बहुत मजबूती मिलेगी। उनकी महिलाओं और ग्रामीण वोटरों के बीच गजब की पकड़ है। तेजस्वी यादव के लिए उनके गढ़ में यह एक बहुत बड़ी सेंधमारी मानी जा रही है।

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