टीआरपी। छत्तीसगढ़ में डी.एड. अभ्यर्थियों की नियुक्ति की मांग को लेकर पिछले 153 दिनों से जारी आंदोलन अब उग्र रूप धारण करने जा रहा है। आम आदमी पार्टी के नेता उत्तम जायसवाल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि यदि 10 जून 2026 तक पात्र अभ्यर्थियों को सहायक शिक्षक के पदों पर नियुक्ति नहीं मिली, तो वे 11 जून 2026 से आमरण अनशन पर बैठेंगे।
यह मामला छत्तीसगढ़ के हजारों डी.एड. प्रशिक्षित युवाओं और उनके परिवारों के भविष्य से सीधे जुड़ा हुआ है। रायपुर के तूता धरना स्थल पर महीनों से बैठे युवाओं में भारी मानसिक और आर्थिक तनाव है, जिनमें एक बड़ी संख्या आदिवासी वर्ग के महिला और पुरुष अभ्यर्थियों की है। इस आंदोलन के और तेज होने से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और सरकारी शिक्षक भर्ती प्रक्रियाओं पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
आम आदमी पार्टी के नेता उत्तम जायसवाल ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक के लगभग 2300 पद रिक्त हैं, जिनमें से करीब 1600 पद आदिवासी वर्ग के अभ्यर्थियों के हैं। माननीय उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद राज्य शासन द्वारा इन पदों पर नियुक्तियां नहीं दी जा रही हैं। उन्होंने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि जायज मांग को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रहे इन बेरोजगार युवाओं को दबाने के लिए तीन बार जेल भेजा गया और कई दिनों तक हिरासत में रखा गया।
लंबे समय से पेंडिंग इस भर्ती प्रक्रिया के कारण अभ्यर्थी इस कदर मानसिक अवसाद से गुजर रहे हैं कि वे आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। प्रदेश मीडिया प्रभारी मिहिर कुर्मी द्वारा जारी इस विज्ञप्ति के माध्यम से ‘आप’ ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार को इस सामाजिक और मानवीय संकट को गंभीरता से लेना होगा। यदि तय समय सीमा यानी 10 जून तक सभी 1600 पात्र डी.एड. अभ्यर्थियों को जॉइनिंग लेटर नहीं दिया गया, तो यह आंदोलन आमरण अनशन के जरिए आर-पार की लड़ाई में बदल जाएगा।
छत्तीसगढ़ के रायपुर (तूता) में डी.एड. अभ्यर्थी पिछले 153 दिनों से लगातार शांतिपूर्ण धरने पर बैठे हैं।
राज्य में सहायक शिक्षक के लगभग 2300 पद रिक्त हैं, जिनमें से 1600 पद सीधे तौर पर पात्र आदिवासी अभ्यर्थियों से जुड़े हैं।
आम आदमी पार्टी की इस सीधी चेतावनी के बाद अब गेंद मुख्यमंत्री सचिवालय और शिक्षा विभाग के पाले में है। देखना होगा कि 10 जून की समय सीमा से पहले साय सरकार इन अभ्यर्थियों के हित में कोई संवेदनशील निर्णय लेती है या फिर 11 जून से रायपुर में एक बड़ा राजनीतिक अनशन शुरू होता है।



