रायपुर। बीजापुर में तेंदूपत्ता गोदाम में लगी आग और 10 करोड़ से ज्यादा के नुकसान पर वन मंत्री केदार कश्यप ने सख्त कदम उठाया है। बीजापुर के वनमंडलाधिकारी रमेश कुमार जांगड़े को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उन्हें PCCF कार्यालय, रायपुर में अटैच किया गया है।

अनुभवी अधिकारी को मिली कमान

मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर जाधव सागर रामचंद्र को बीजापुर का नया DFO बनाया गया है। वे फिलहाल राज्य लघु वनोपज संघ में पदस्थ हैं और तेंदूपत्ता संग्रहण-प्रबंधन के माहिर माने जाते हैं। दंतेवाड़ा में उनके काम को देखते हुए संवेदनशील बीजापुर जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में इस कार्रवाई को वनवासियों के हित में कड़ा संदेश माना जा रहा है।

“आदिवासियों की आजीविका से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”

वन मंत्री केदार कश्यप ने साफ कहा, “तेंदूपत्ता सिर्फ वन उपज नहीं, हजारों आदिवासी-वनवासी परिवारों की आजीविका का आधार है। उनकी मेहनत और अधिकारों की रक्षा करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। किसी भी स्तर की लापरवाही बख्शी नहीं जाएगी, दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई होगी।”

See also  छत्तीसगढ़ में दौड़ेगी विकास की रफ्तार: ACS ऋचा शर्मा का बड़ा निर्देश, 1 जुलाई से लागू होगा यह नया नियम!

25 मई को लगी थी आग, 10 करोड़ का नुकसान

25 मई 2026 को बीजापुर के इटपाल स्थित निजी गोदाम में भीषण आग से कई समितियों का संग्रहित तेंदूपत्ता जलकर खाक हो गया। शुरुआती आकलन में 10 करोड़ से ज्यादा का नुकसान बताया जा रहा है। वास्तविक क्षति का भौतिक सत्यापन अभी जारी है।

6 दमकल गाड़ियां, 45 कर्मचारी फिर भी नहीं बुझी आग

आग बुझाने के लिए बीजापुर के साथ-साथ पड़ोसी जिला दंतेवाड़ा, बचेली और किरंदुल से भी दमकल गाड़ियां मंगानी पड़ीं। कुल 6 दमकल वाहन और करीब 45 कर्मचारी 30 घंटे तक लगातार आग बुझाने में जुटे रहे। NMDC की टीम भी मौके पर सहायता कर रही है। इसके बावजूद अब तक आग पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा इंतजाम किए गए होते तो इतना बड़ा नुकसान नहीं होता। अब पूरे मामले में आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है, लेकिन वन विभाग की लापरवाही को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

See also  20 नवंबर से भाठागांव टर्मिनल अंतरराज्यीय बस स्टैंड को शुरू करने की तैयारी

उच्चस्तरीय बैठक, निष्पक्ष जांच के आदेश

घटना की जानकारी मिलते ही मंत्री ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई। उन्होंने आग के कारणों, गोदामीकरण प्रक्रिया, सुरक्षा मानकों, अधिकारियों की भूमिका और वित्तीय क्षति की पूरी जांच के आदेश दिए हैं। मंत्री ने कहा कि जांच निष्पक्ष, समयबद्ध और तथ्यात्मक हो ताकि जिम्मेदारी तय हो सके।

सुरक्षा होगी और मजबूत

शासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए गोदामों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। वन संपदा और आदिवासी हितों की रक्षा में लापरवाही पर तुरंत सख्त कार्रवाई का संदेश दे दिया गया है।