रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने जमीन से जुड़े राजस्व मामलों की सुनवाई में बड़ा बदलाव किया है। अब SDM कोर्ट के फैसले के खिलाफ संभाग कमिश्नर के पास जाने की जरूरत नहीं होगी। याचिकाकर्ता सीधे अपने जिले के कलेक्टर के यहां अपील कर सकेंगे। इससे लोगों को संभाग मुख्यालय के चक्कर और 100 किमी तक की यात्रा से छुटकारा मिल गया है।
पांच-छह जिलों का लोड, पेशी में सालों लगते थे
अब तक SDM के फैसले से असंतुष्ट पक्ष को संभाग कमिश्नर के यहां अपील करनी पड़ती थी। हर संभाग में पांच से छह जिले आते हैं। इस वजह से संभाग मुख्यालय में केसेस का अंबार लग जाता था और पेशी की तारीखें महीनों बाद मिलती थीं। रायगढ़, सारंगढ़ और कोरबा जैसे दूरस्थ जिलों के लोगों को हर पेशी पर बिलासपुर आना पड़ता था। नई व्यवस्था से यह दौड़ खत्म हो गई है।
28 अप्रैल से लागू, 3000 केस जिलों में लौटे
राज्य सरकार ने 28 अप्रैल 2026 से नई व्यवस्था लागू कर दी है। बिलासपुर संभाग में इसके तहत करीब 3000 केस कमिश्नर कार्यालय से जिलों के कलेक्टरों को भेज दिए गए हैं। अकेले बिलासपुर कलेक्टर कोर्ट से कमिश्नर को भेजे गए 600 केस वापस आ गए हैं। अब इन सभी मामलों की सुनवाई संबंधित जिले में ही होगी।
पुनरीक्षण 30 दिन, आवेदन 90 दिन में निपटेंगे
सरकार ने केस निपटारे की समयसीमा भी तय कर दी है। पुनरीक्षण के केस 30 दिन में और आवेदनों पर 90 दिन के भीतर फैसला देना होगा। इससे अधिकारियों पर समय पर सुनवाई का दबाव रहेगा और लोगों को सालों इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
क्यों जरूरी था बदलाव
संभाग कमिश्नर कार्यालयों पर केसों का लोड लगातार बढ़ रहा था। लंबी तारीखों के कारण फैसले अटक जाते थे और प्रभावित पक्ष सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहते थे। कलेक्टरों को अधिकार मिलने से केसों का बंटवारा होगा और जिलों में ही तेजी से सुनवाई संभव होगी।


