टीआरपी। रायपुर नगर निगम की एमआईसी (MIC) बैठक के बाद शहर की मूलभूत समस्याओं को लेकर सियासत गरमा गई है। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने महापौर के बयानों पर तीखा पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि निगम सरकार जनता को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसा रही है और अपनी विफलताओं को छुपाने के लिए शहरवासियों को ही जिम्मेदार ठहरा रही है।
रायपुर के कई वार्डों में भीषण गर्मी के बीच पेयजल का भारी संकट बना हुआ है। ऐसे समय में नगर निगम के भीतर चल रही यह सियासी जंग सीधे तौर पर आम नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं (पानी, सफाई और पेंशन) से जुड़ी हुई है। विपक्ष के इन तीखे तेवरों के बाद अब निगम प्रशासन पर प्रभावित इलाकों में जलापूर्ति और सफाई व्यवस्था को जल्द से जल्द दुरुस्त करने का प्रशासनिक दबाव बेहद बढ़ जाएगा।
निगम नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने एमआईसी की बैठक को पूरी तरह निराशाजनक बताते हुए कहा कि लोगों की निगाहें इस बैठक पर टिकी थीं कि पानी और सफाई का कोई ठोस समाधान निकलेगा, लेकिन निगम प्रशासन के पास इसके लिए कोई एजेंडा ही नहीं था। उन्होंने पेंशन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि शहर के गरीब बुजुर्गों और जरूरतमंदों को कई महीनों से सामाजिक सुरक्षा पेंशन नहीं मिली है, जिससे उनका गुजारा मुश्किल हो गया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सामान्य सभा में लगातार आवाज उठाने के बाद आखिरकार शहीद आकाश राव गिरिपुंजे की मूर्ति लगाने के फैसले का वे साधुवाद करते हैं, लेकिन अन्य मामलों में जनता को सिर्फ गुमराह किया जा रहा है।
महापौर द्वारा जल संकट के लिए नागरिकों को वाटर हार्वेस्टिंग न करने को लेकर दिए गए बयान पर आकाश तिवारी ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार महापौर को इस तरह अपनी नैतिक जिम्मेदारी से भागते हुए जनता पर दोष मढ़ना शोभा नहीं देता। वाटर हार्वेस्टिंग अपनी जगह अच्छी बात है, लेकिन नागरिकों को पीने का साफ पानी देना उनका मौलिक अधिकार है और निगम का पहला कर्तव्य है। अपनी नाकामी को छुपाने के लिए शहर की जनता को ही जल समस्या का जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह गलत और संवेदनहीन है।
नेता प्रतिपक्ष ने रायपुर के कई वार्डों में कई महीनों से अटकी हुई बुजुर्गों की पेंशन और ठप पड़ी सफाई व्यवस्था को लेकर निगम को घेरा है।
लंबे विवाद के बाद आखिरकार शहीद आकाश राव गिरिपुंजे की प्रतिमा स्थापित करने के निर्णय पर विपक्ष ने अपनी सहमति और साधुवाद जताया है।
विपक्ष के इस कड़े रुख और जल संकट पर आंदोलन की चेतावनी के बाद, उम्मीद है कि नगर निगम प्रशासन पेयजल प्रभावित वार्डों में टैंकरों की संख्या बढ़ाने और वाटर सप्लाई नेटवर्क को ठीक करने के लिए तत्काल आपातकालीन कदम उठाएगा।



