बिलासपुर। कुत्ते के काटने से बेटे की मौत पर पिता ने राज्य शासन से 4 लाख मुआवजे की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। मामले में सरकार ने कोर्ट में कहा कि कुत्ते के काटने से मौत पर मुआवजा देने का कोई स्पष्ट नियम मौजूद नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से शपथ पत्र के साथ विस्तृत जवाब मांगा है।

प्रशासन की लापरवाही से हुई मौत: पिता

याचिकाकर्ता धीरज पारधी ने बताया कि उसके बेटे की मौत कुत्ते के काटने से हुई। आरोप है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या के बावजूद प्रशासन ने प्रभावी नियंत्रण नहीं किया, जिससे यह घटना हुई। याचिका में स्थानीय प्रशासन और विभागों की लापरवाही को जिम्मेदार बताते हुए 4 लाख क्षतिपूर्ति की मांग की गई है।

सरकार का जवाब: मुआवजे का प्रावधान नहीं

जस्टिस एनके व्यास की वेकेशन बेंच में सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता आरके गुप्ता ने कहा कि फिलहाल शासन के पास ऐसा कोई नियम नहीं है, जिसके तहत कुत्ते के काटने से मौत पर मुआवजा दिया जा सके।

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हाईकोर्ट सख्त: क्या कदम उठाए जा रहे?

कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए मुख्य सचिव से पूछा है कि आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही यह भी पूछा कि कुत्तों के हमले से मौत या गंभीर चोट पर पीड़ित परिवार को राहत देने की कोई नीति क्यों नहीं बनाई गई।

30 जून को अगली सुनवाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 30 जून तय की है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का निर्देश भविष्य में मुआवजा नीति की दिशा तय कर सकता है। इस मामले ने राज्य सरकार को असमंजस में डाल दिया है। एक तरफ जनसुरक्षा का सवाल है, दूसरी तरफ कानूनी प्रावधान का अभाव।