रायपुर/चेन्नई। तिरुवल्लूर जिले के देवंदवक्कम गांव की एक बड़ी गौशाला में जांजगीर-चांपा के 48 मजदूरों को बंधक बनाकर काम कराया जा रहा था। वहां से भाग निकले एक श्रमिक ने अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद पुलिस और राजस्व विभाग की टीम ने छापा मारकर सभी को मुक्त कराया। छुड़ाए गए लोगों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। स्थानीय प्रशासन की मदद से मजदूरों को छुड़ाने में मदद मिली।

14 घंटे काम, मजदूरी नहीं

मजदूरों ने बताया कि गौशाला में करीब 2000 गायें हैं। मजदूरों से उनकी देखभाल समेत दूसरे कामों में रोज 14 घंटे से ज्यादा काम लिया जा रहा था। जांच में सामने आया कि 25 दिनों तक किसी को मजदूरी नहीं दी गई। मजदूरों को परिसर छोड़ने की इजाजत भी नहीं थी।

700 रु. रोज का झांसा, 75 हजार अग्रिम

अधिकारियों के मुताबिक श्रमिक ठेकेदार अरविंद ने इन्हें काम दिलाया था। गौशाला मालिक नटराजन और उनकी पत्नी पर आरोप है कि हर दंपति को 700 रु. रोज देने का वादा किया गया। परिवहन के लिए 75 हजार रु. अग्रिम भी दिए गए। पहला दल 5 मई को पहुंचा था, दूसरा दल बच्चों के साथ बाद में गया।

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मालिक दंपति पर केस दर्ज

पुलिस ने 60 वर्षीय गौशाला मालिक नटराजन और उनकी पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। राजस्व मंडल अधिकारी रविचंद्रन ने बताया कि बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई होगी। हालांकि जांच में शारीरिक प्रताड़ना के सबूत नहीं मिले, लेकिन अमानवीय परिस्थितियों में काम कराने की पुष्टि हुई है।

पीड़ितों को मिलेगी राहत राशि

प्रशासन ने बताया कि सभी 48 पीड़ितों के बैंक खाते खुलवाए जा रहे हैं। केंद्र प्रायोजित योजना के तहत हर पीड़ित को 35 हजार रु. तत्काल राहत मिलेगी। प्रशासन इन्हें जल्द छत्तीसगढ़ वापस भेजने की व्यवस्था कर रहा है।