टीआरपी डेस्क। शेयर बाजार के निवेशकों और वेदांता ग्रुप के लिए एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। इस महीने वेदांता की 4 नई कंपनियों की लिस्टिंग होने वाली थी, लेकिन ठीक उससे पहले कंपनी के फाउंडर अनिल अग्रवाल पर बड़ी मुसीबत आ गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वेदांता ग्रुप के कई बड़े ठिकानों पर एक साथ छापा मारा है। यह तलाशी अभियान सोमवार से लगातार जारी है।
विदेशी लेनदेन को लेकर शुरू हुई बड़ी जांच
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) से जुड़े एक मामले को लेकर की जा रही है। ED को शक है कि विदेशी मुद्रा के लेनदेन में कुछ गड़बड़ी हुई है। अभी भी कई जगहों पर जांच की जा रही है और इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
डीमर्जर प्लान के ठीक बाद लगा बड़ा झटका
यह छापा ऐसे समय पर पड़ा है जब ठीक एक महीने पहले ही कंपनी को अपने सिक्योर्ड लेनदारों से एक बड़े डीमर्जर प्लान के लिए मंजूरी मिली थी। इस प्लान के तहत कंपनी को 5 अलग-अलग आजाद कंपनियों में बांटा जाना है, जिनमें से 4 की लिस्टिंग इसी महीने होनी तय थी। बाजार के जानकार मान रहे हैं कि लिस्टिंग के ठीक पहले ED के इस एक्शन से निवेशकों के बीच थोड़ा डर का माहौल बन सकता है।
पहले भी विवादों से रहा है पुराना नाता
यह कोई पहली बार नहीं है जब यह माइनिंग कंपनी किसी बड़ी मुसीबत में फंसी हो। वेदांता का विवादों से पुराना नाता रहा है।
- इसी साल अप्रैल 2026 में छत्तीसगढ़ के एक पावर प्लांट में बॉयलर फटने से 20 से ज्यादा मजदूरों की मौत हो गई थी, जिसके बाद अनिल अग्रवाल समेत टॉप लीडरशिप पर FIR दर्ज हुई थी।
- पिछले ही महीने ओडिशा में बिना इजाजत नदी और नहर से पानी निकालने के आरोप में वेदांता एल्युमीनियम पर ₹233.11 करोड़ का भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया था।
- अब FEMA के तहत ED यह जांच कर रही है कि कहीं नियमों के खिलाफ जाकर विदेश में पैसा तो नहीं भेजा गया या वहां अवैध संपत्ति तो नहीं बनाई गई।



