रायपुर। मैनपाट में विधायक और नायब तहसीलदार के बीच शुरू हुआ विवाद अब पूरे प्रदेश में फैल चुका है। सरकार से बातचीत बेनतीजा रहने के बाद अब प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल पर अफसरों ने डेरा डाल दिया है। काम पूरी तरह ठप है।

इस पूरे बवाल के बीच भाजपा के विधायक अजय चंद्राकर का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि की एक गरिमा होती है और अधिकारियों को उसका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अधिकारियों को खुद आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर लक्ष्मण रेखा किसने लांघी है।

विधायक के इस बयान के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल और तेज हो गई है। दूसरी तरफ, छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ अपनी मांगों को लेकर अड़ा हुआ है। रायपुर के तूता मैदान में तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों का जोरदार प्रदर्शन जारी है।

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अफसरों का कहना है कि 27 मई को मैनपाट के उप तहसील राजापुर में जो कुछ भी हुआ, वह किसी एक अधिकारी का निजी मामला नहीं है। यह सीधे तौर पर पूरे राजस्व प्रशासन और अदालती व्यवस्था के सम्मान पर हमला है।

संघ इस बात से बेहद नाराज है कि मारपीट के मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई। अब इस लड़ाई में तृतीय वर्ग संघ के पूर्व प्रांत अध्यक्ष विजय कुमार झा, छात्रावास अधीक्षक संघ और राजस्व पटवारी संघ भी कूद पड़े हैं। सभी ने घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है।

इस खींचतान की वजह से 1 जून से पूरे छत्तीसगढ़ में तहसीलों के ताले लटके हुए हैं। लोग जाति, निवास, आय प्रमाण पत्र और जमीन की रजिस्ट्री-नामांतरण जैसे जरूरी कामों के लिए भटक रहे हैं। अधिकारी सामूहिक अवकाश पर हैं।

मामले को बिगड़ता देख सरकार भी अब डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि विभाग की सचिव शम्मी आबिदी और तहसीलदार संघ के पदाधिकारियों के बीच लंबी बातचीत हुई है। मंत्री ने अधिकारियों से काम पर लौटने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया है कि बहुत जल्द इस पूरे विवाद का रास्ता निकाल लिया जाएगा।

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