टीआरपी।छत्तीसगढ़ की साय सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण की दिशा में संपत्ति रजिस्ट्री शुल्क में दी गई भारी छूट के जमीन पर बेहद सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर महिलाओं के नाम होने वाली रजिस्ट्री में 50 प्रतिशत की छूट और 12 प्रतिशत उपकर (Cess) समाप्त किए जाने के बाद बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में महिलाओं के नाम पर संपत्ति पंजीयन कराने की होड़ मच गई है।
यह बदलाव छत्तीसगढ़ की महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। रजिस्ट्री का खर्च आधा होने से न केवल आम परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिल रही है, बल्कि समाज में महिलाओं के नाम पर संपत्ति का कानूनी अधिकार भी बेहद मजबूत हो रहा है, जिससे उनका सामाजिक स्तर ऊंचा उठेगा।
शहरी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा असर, एक महीने में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
जिला पंजीयक कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, शासन की इस बड़ी रियायत के चलते महज एक महीने के भीतर महिलाओं के पक्ष में होने वाली रजिस्ट्रियों में रिकॉर्ड 70 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल 2026 में जिले के पांचों उप पंजीयक कार्यालयों में महिलाओं के नाम पर कुल 309 दस्तावेज पंजीकृत हुए थे, जो मई 2026 में बढ़कर 445 तक पहुँच गए। ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों जैसे बलौदाबाजार और भाटापारा में यह भागीदारी तेजी से बढ़ी है।
जिला पंजीयक विनोद कोचे और बलौदाबाजार के उप पंजीयक विपुल श्रीवास्तव ने बताया कि अप्रैल 2026 से 12 प्रतिशत उपकर समाप्त होने से इस प्रक्रिया में और तेजी आई है। अकेले बलौदाबाजार कार्यालय में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अब तक 107 अधिक दस्तावेजों का पंजीयन हो चुका है। इससे आम जनता को बड़ी आर्थिक राहत मिलने के साथ-साथ रजिस्ट्रियों की संख्या बढ़ने से शासन के राजस्व में भी इजाफा हो रहा है। योजना की लाभार्थी नमिता साहू ने बताया कि खर्च आधा होने से अब महिलाओं के नाम पर जमीन और मकान खरीदना बेहद आसान और सुरक्षित हो गया है।
ब्लॉकवार आंकड़ों पर एक नजर (अप्रैल बनाम मई 2026)
बलौदाबाजार: अप्रैल में 78 से बढ़कर मई में 119 दस्तावेज हुए।
सिमगा: अप्रैल में 56 से बढ़कर मई में 99 दस्तावेज हुए।
पलारी: अप्रैल में 40 से बढ़कर मई में 56 दस्तावेज हुए।
कसडोल: अप्रैल में 24 से बढ़कर मई में 50 दस्तावेज हुए।
भाटापारा: अप्रैल में 111 से बढ़कर मई में 121 दस्तावेज हुए।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के मार्गदर्शन में लिए गए इस फैसले के बाद आने वाले महीनों में राज्य के अन्य जिलों में भी महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री के आंकड़ों में भारी उछाल आने की उम्मीद है। यह नीति भविष्य में छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण का एक नया अध्याय लिखेगी।



