टीआरपी। छत्तीसगढ़ में सीतापुर की घटना के विरोध में प्रदेशभर के 500 से अधिक तहसीलदार और नायब तहसीलदार सामूहिक हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे राज्य की सभी तहसीलों में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। अधिकारियों की इस बेमियादी हड़ताल के कारण आगामी 7 जून 2026 तक तहसील कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहने की संभावना है।
इस हड़ताल का सीधा और बड़ा असर छत्तीसगढ़ के आम नागरिकों और छात्रों पर पड़ रहा है। तहसील कार्यालयों में ताला लटकने से आय, जाति, मूल निवास प्रमाण-पत्र, नामांतरण, सीमांकन और खसरा सुधार जैसे अति-आवश्यक काम पूरी तरह रुक गए हैं। कोर्ट की तारीखें आगे बढ़ने से कानूनी और राजस्व मामलों के फरियादियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सीतापुर विवाद के बाद भड़का आक्रोश, अदालतों में पसरा सन्नाटा
दरअसल, हाल ही में सीतापुर में नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ कथित तौर पर अभद्रता और मारपीट की घटना सामने आई थी। इस मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार संघ ने सरकार से बातचीत की थी, लेकिन कोई ठोस एक्शन नहीं होने से नाराज अधिकारियों ने हड़ताल का रास्ता चुना। इस बीच खबर आ रही है कि मामले से जुड़े विधायक समर्थक पंकज गुप्ता और नाजिम रजा ने सरेंडर कर दिया है, लेकिन अधिकारी मुख्य दोषियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं।
हड़ताल के कारण तहसील न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की सुनवाई एक सप्ताह के लिए टाल दी गई है। 2 जून को होने वाले प्रकरणों की सुनवाई अब सीधे 8 जून को होगी, वहीं 3, 4 और 5 जून की तारीखों को भी अगले सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है। राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश के तहसील कार्यालयों में जानकारी के अभाव में पहुँच रहे ग्रामीणों और आम लोगों को बैरंग लौटना पड़ रहा है।
मामले में सियासत तेज, कांग्रेस ने किया हड़ताल का समर्थन
इस प्रशासनिक गतिरोध के बीच अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने राजस्व अधिकारियों की इस हड़ताल को पूरी तरह जायज ठहराया है। कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सत्ता के अहंकार में भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
कांग्रेस का कहना है कि घटना को एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है। यदि विधायक को अधिकारी की कार्यप्रणाली से कोई शिकायत थी, तो उन्हें उच्च अधिकारियों या मुख्यमंत्री से बात करनी चाहिए थी, न कि कानून अपने हाथ में लेना था।
हड़ताल की अवधि: आगामी 7 जून 2026 तक प्रदेश की सभी तहसीलों में काम बंद रखने का निर्णय।
प्रभावित अधिकारी: पूरे छत्तीसगढ़ से 500 से अधिक तहसीलदार और नायब तहसीलदार आंदोलन में शामिल।
अटके काम: आय-जाति प्रमाण पत्र, नामांतरण, बटांकन, सीमांकन और जमीनी राजस्व के सभी मामले ठप।
यदि सरकार और हड़ताली तहसीलदारों के बीच जल्द ही कोई ठोस सहमति नहीं बनती है, तो यह प्रशासनिक संकट और गहरा सकता है। 7 जून के बाद अधिकारियों का संघ अपनी अगली रणनीति का एलान करेगा, जिस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।



