टीआरपी डेस्क। कोलकाता की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में फूट पड़ गई है। पार्टी से निकाले गए बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा अचानक भारी लाव-लश्कर के साथ बंगाल विधानसभा पहुंच गए हैं। उनके इस कदम से पूरी कोलकाता पुलिस और खुफिया विभाग अलर्ट पर है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इन बागी विधायकों ने 50 से ज्यादा विधायकों के समर्थन का दावा कर दिया है। यह आंकड़ा सामने आते ही टीएमसी के बड़े नेताओं के पसीने छूट गए हैं। दीदी की मुश्किलें अब बहुत ज्यादा बढ़ती दिख रही हैं।

ऋतब्रत बनेंगे नए नेता प्रतिपक्ष?

सूत्रों की मानें तो कोलकाता के विधायक हॉस्टल में पिछले दो दिनों से गुप्त बैठकों का दौर चल रहा था। अब खबर आ रही है कि बागी गुट ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नया नेता प्रतिपक्ष बनाने की तैयारी में है।

See also  आतंकवाद के खिलाफ गृह मंत्रालय का बड़ा एक्शन, यासीन मलिक की पार्टी पर और 5 साल के लिए रहेगी प्रतिबंधित

यह पूरी बगावत तब भड़की जब सोमवार को टीएमसी ने ऋतब्रत और संदीपन को पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाकर बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इसके बाद दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि 6 मई को सदन के बड़े पदों के लिए जो प्रस्ताव पत्र तैयार हुआ था, उस पर कई विधायकों के फर्जी दस्तखत किए गए थे। दोनों का कहना है कि उनके खुद के दस्तखत भी जाली थे।

ममता बनर्जी के हाथ से हाईजैक हुई पार्टी

ऋतब्रत बनर्जी ने इशारों-इशारों में अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि पार्टी को ममता बनर्जी के हाथों से हाईजैक कर लिया गया है। कोलकाता के डलहौजी इलाके और कालीघाट के करीब सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार टीएमसी सिर्फ 80 सीटें ही जीत पाई थी। अब 50 विधायकों के टूटने के दावे के बाद पूरा सियासी गणित उलट-पुलट गया है। बंगाल का यह खेल बिल्कुल वैसा ही नजर आ रहा है, जैसा साल 2022 में महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ हुआ था।

See also  स्वतंत्रता दिवस : जमीन से आसमान तक लालकिले की सुरक्षा, लगाए गए 10 हजार से ज्यादा जवान

दल-बदल कानून और सीटों का गणित

कानून के हिसाब से अपनी विधायकी बचाने और असली टीएमसी होने का दावा करने के लिए बागी गुट को दो-तिहाई विधायकों की जरूरत होगी। टीएमसी के 80 विधायकों में से दो-तिहाई का आंकड़ा 54 बैठता है।

अगर ऋतब्रत का यह दावा सच साबित होता है, तो ममता बनर्जी की पार्टी के हाथ से मुख्य विपक्षी दल का दर्जा भी छिन सकता है। नियम कहता है कि मुख्य विपक्षी दल बने रहने के लिए कम से कम 29 विधायक होने जरूरी हैं। अगर दीदी की पार्टी में इतनी बड़ी फूट पड़ी, तो टीएमसी इतिहास के सबसे खराब दौर में पहुंच जाएगी।