दुर्ग जनपद सीईओ रूपेश पाण्डेय निलंबित

कोरबा। जिले में डीजल चोरी के बड़े नेटवर्क की जांच में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अवैध कारोबार पर सख्ती का दावा करने वाली पुलिस के ही कुछ कर्मचारी डीजल माफियाओं से सांठगांठ कर वसूली में लगे थे। खुलासे के बाद एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने साइबर सेल के एक आरक्षक समेत चार पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर दिया।

फरार सरगना की गिरफ्तारी से खुली पोल

एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने अवैध कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद दीपका पुलिस ने डीजल चोर गिरोह के फरार सरगना इनामी बदमाश नवीन कश्यप और उसके साथी पुरुषोत्तम व सब्बीर को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने पुलिसकर्मियों से संपर्क और संरक्षण के बदले वसूली की बात कबूली।

साइबर सेल का आरक्षक भी शामिल

  पूछताछ में कुछ पुलिसकर्मियों के साथ संपर्क और संरक्षण के एवज में कथित वसूली की जानकारी सामने आई। जांच में साइबर सेल में पदस्थ आरक्षक प्रशांत सिंह समेत बांकीमोंगरा और कटघोरा थाना क्षेत्र के तीन अन्य पुलिसकर्मियों के नाम सामने आने के बाद विभागीय जांच शुरू की गई।

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निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में साइबर सेल में पदस्थ आरक्षक प्रशांत सिंह, कटघोरा में पदस्थ प्रधान आरक्षक गोपाल यादव तथा बाकी मोगरा थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक राजेश कंवर और आरक्षक रोहित राठौर शामिल हैं।

कई सवाल अब भी बाकी

इस कार्रवाई से कई सवाल उठे हैं। अगर डीजल चोरी लंबे समय से चल रही थी तो स्थानीय स्तर पर जानकारी क्यों नहीं मिली? क्या संरक्षण का नेटवर्क सिर्फ चार पुलिसकर्मियों तक सीमित था या इसके तार और ऊपर तक जुड़े हैं? साइबर सेल के जवान का नाम आने से अपराधियों और पुलिस के बीच संपर्क के स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं।

अवैध कारोबार पर लग चुके हैं आरोप

कोरबा में डीजल, कबाड़ और अन्य अवैध कारोबारों को लेकर पहले भी पुलिस संरक्षण के आरोप लगते रहे हैं। यह कार्रवाई विभागीय सख्ती का संदेश तो देती है, लेकिन साथ ही उजागर करती है कि अवैध कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद क्यों थे। अब नजर विभागीय जांच पर है कि आगे और किन नामों का खुलासा होता है।

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