बिलासपुर। सेवानिवृत्त खाद्य अधिकारी द्वारिका दास भूतड़ा को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। आय से अधिक संपत्ति मामले में विशेष न्यायालय द्वारा तय आरोपों को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी गई। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु की खंडपीठ ने कहा कि 30 साल पुराना मामला होने के बावजूद रिकॉर्ड प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि करते हैं।
क्या है पूरा मामला?
ACB ने 1995 में द्वारिका दास भूतड़ा के खिलाफ केस दर्ज किया था। जांच में 1 जनवरी 1976 से 13 सितंबर 1995 के बीच आय और संपत्ति का परीक्षण हुआ। राज्य सरकार ने 13 अक्टूबर 2020 को अभियोजन स्वीकृति दी। इसके बाद 2025 में विशेष न्यायालय ने आरोप तय किए।
43.38 लाख की अतिरिक्त संपत्ति मिली
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि भूतड़ा के पास ज्ञात आय स्रोतों से 43 लाख 38 हजार 887 रुपये की अतिरिक्त संपत्ति मिली। यह उनकी घोषित आय के मुकाबले 303.45% ज्यादा थी। जांच में पत्नी और बच्चों के नाम पर भी संपत्तियां, शेयर और डिबेंचर खरीदे जाने की बात सामने आई।
83 साल की उम्र का दिया हवाला
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि वे अब 83 वर्ष के हैं और 30 साल बाद आरोप तय हुए हैं, इसलिए मुकदमा चलाना निरर्थक है। यह भी कहा कि जांच इतने साल लंबित क्यों रही, इसका जवाब एजेंसी नहीं दे सकी।
HC बोला- देरी से कार्यवाही खत्म नहीं होगी
खंडपीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट पहले ही डिस्चार्ज आवेदन खारिज कर चुका है। दस्तावेजों से प्रथम दृष्टया अभियोजन के लिए पर्याप्त सामग्री दिखती है। कोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट के 3 मई 2025 और 21 अप्रैल 2026 के आदेशों में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।
6 महीने में ट्रायल पूरा करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने कहा कि आर्थिक अपराधों का तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचना जरूरी है। विशेष न्यायालय को निर्देश दिया कि कानूनी बाधा न हो तो 6 महीने में सुनवाई पूरी करे। किसी पक्ष को अनावश्यक विलंब न हो। इसके साथ द्वारिका दास भूतड़ा के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रहेगी।



