रायपुर। छत्तीसगढ़ में घर या फ्लैट खरीदकर रहने वालों के लिए एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। राजधानी रायपुर समेत पूरे प्रदेश में रियल एस्टेट कारोबारियों पर रेरा ने अब तक का सबसे बड़ा चाबुक चलाया है। प्रदेश के 595 प्रमोटर्स के 989 प्रोजेक्ट्स को सीधे नोटिस भेज दिया गया है। मामला मकान मिलने के बाद भी मिलने वाली सुविधाओं और कागजातों से जुड़ा है।

आखिर क्यों भड़का रेरा?

बिल्डर्स ने बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स और कॉलोनियां तो खड़ी कर दीं। लोगों को पजेशन भी मिल गया। लेकिन खेल यहीं शुरू हुआ। प्रोजेक्ट पूरा होने का सर्टिफिकेट मिलने के बाद भी बिल्डर्स ने वहां का कॉमन एरिया, पार्क, जिम जैसी सुविधाएं और जरूरी कागजात खरीदारों की सोसायटी को नहीं सौंपे। रेरा की जांच में यह बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। इसके बाद विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है।

खरीदारों की भी तय हुई जिम्मेदारी

अक्सर देखा गया है कि लोग घर लेकर बैठ जाते हैं। रेरा ने साफ किया है कि सिर्फ प्रमोटर की गलती नहीं है। कानून के मुताबिक, मकान या फ्लैट खरीदने वाले हर इंसान का यह फर्ज है कि वह अपनी सोसायटी या एसोसिएशन बनाने में आगे आए। जब तक आप लोग मिलकर समिति नहीं बनाएंगे, तब तक बिल्डर कागजात किसे सौंपेगा? इसलिए जनता को भी अब जागना होगा।

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15 दिन में जवाब नहीं तो सीधे कोर्ट केस

रेरा ने साफ लहजे में चेतावनी दी है। सभी प्रमोटर्स को जवाब देने के लिए सिर्फ 15 दिन का समय मिला है। अगर तय समय में बिल्डर्स ने यह नहीं बताया कि आखिर अब तक उन्होंने कॉमन एरिया और कागजात ट्रांसफर क्यों नहीं किए, तो उनके खिलाफ सीधे केस दर्ज होगा। सूत्रों की मानें तो कुछ बड़े बिल्डर्स पर भारी जुर्माना भी लग सकता है।

रेरा ने साफ किया है कि उसका काम सिर्फ नए प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन करना नहीं है। मकान मिलने के बाद भी ग्राहकों के हक की रक्षा करना उसकी पहली जिम्मेदारी है।