टीआरपी डेस्क। मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव की रेस से बाहर हुईं कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (12 जून 2026) को हुई एक अहम सुनवाई के बाद मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपना नामांकन (Nomination) रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।

मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ शब्दों में कहा कि एक बार जब चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाती है, तो अदालत सामान्यतः उसमें बीच में हस्तक्षेप नहीं करती है।

क्या है पूरा विवाद?

मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव और रिटर्निंग ऑफिसर (RO) अरविंद शर्मा ने 9 जून को मीनाक्षी नटराजन के नामांकन फॉर्म को निरस्त कर दिया था।भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आरोप लगाया था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे (Affidavit) में तेलंगाना (हैदराबाद) की एक अदालत में लंबित आपराधिक मामले/समंस की जानकारी छिपाई है।

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कांग्रेस का तर्क

कांग्रेस और नटराजन का पक्ष था कि जिस मामले का हवाला दिया जा रहा है, वह असल में कोई क्रिमिनल एफआईआर (FIR) नहीं है। वह एक निजी शिकायत थी जिसमें नटराजन आरोपी नहीं बल्कि सिर्फ एक प्रतिवादी (Respondent) थीं और अदालत ने उस पर संज्ञान (Cognizance) भी नहीं लिया था। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या और जानबूझकर किया गया कृत्य बताया था।