ग्रामीणों ने एक दिन में खड़े किए 2000 वाटर मॉडल

टीआरपी। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मानसून से पहले वर्षा जल संचयन के लिए शुरू किए गए “मोर गाँव, मोर पानी” महाअभियान के तहत बलरामपुर जिले में ग्रामीणों ने श्रमदान कर एक ही दिन में 2000 नग जल संरक्षण मॉडल का निर्माण कर नया इतिहास रच दिया है। इस जनआंदोलन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और पंचायत अमले ने मिलकर भूजल संवर्धन के लिए यह बड़ी कामयाबी हासिल की है।

बलरामपुर जिला पहाड़ी और पथरीले क्षेत्रों से घिरा हुआ है, जहां गर्मियों में भूजल स्तर तेजी से नीचे चला जाता है। मानसून की दस्तक से ठीक पहले एक ही दिन में 2000 जल संरक्षण संरचनाओं (5 प्रतिशत मॉडल) के तैयार होने से इस बार बारिश के पानी का अधिकतम संचयन स्थानीय स्तर पर ही हो सकेगा, जिससे क्षेत्र के किसानों को सिंचाई और ग्रामीणों को पेयजल के संकट से हमेशा के लिए बड़ी राहत मिलेगी।

राज्य सरकार के निर्देश पर जल सुरक्षा को मजबूत करने और जल संरक्षण को जन-जन तक पहुंचाने के लिए यह महाअभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में 13 जून 2026 को बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड में सामूहिक जिम्मेदारी की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली। ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, आवास मित्र और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सुबह से ही मैदान में उतरकर जल संचयन संरचनाओं के निर्माण के लिए कुदाल और फावड़े थाम लिए।

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प्रशासनिक स्तर पर इस महाअभियान को पूरी तरह सफल और पारदर्शी बनाने के लिए ग्राम पंचायतों के विशेष क्लस्टर तैयार किए गए थे, जहां नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग और सतत समीक्षा की जा रही है। जिला प्रशासन और ग्रामीणों के इस संयुक्त प्रयास से अब पूरे क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों को सहेजने की एक नई संस्कृति का जन्म हो रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान साबित होगी।

एक दिन का रिकॉर्ड: बलरामपुर के रामचंद्रपुर विकासखंड में एक ही दिन में 2000 नग जल संरक्षण संरचनाओं (5% मॉडल) का निर्माण पूरा।

मुख्य भागीदार: ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, महिला स्व-सहायता समूह (SHGs), सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक।

मूल उद्देश्य: आगामी मानसून के वर्षा जल का संग्रहण कर भूजल स्तर (Groundwater Level) में सुधार लाना।

आगामी मानसून के आगमन को देखते हुए पूरे बलरामपुर जिले सहित प्रदेशभर के अन्य विकासखंडों में भी जल संरक्षण के इस अभियान को और तेज किया जाएगा, ताकि बारिश की एक-एक बूंद को सहेजकर छत्तीसगढ़ को जल-सुरक्षित राज्य बनाया जा सके।

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