छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई

टीआरपी। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक और सदस्य सरला कोसरिया की उपस्थिति में रायपुर कार्यालय में 396वीं प्रदेश स्तरीय जनसुनवाई संपन्न हुई। इस सुनवाई के दौरान शासकीय नवीन महाविद्यालय नवागांव में सहायक प्राध्यापकों के बीच कार्यस्थल पर उत्पीड़न और छात्रों को डराने-धमकाने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है।

यह मामला छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा संस्थानों में महिला प्राध्यापकों की कार्यस्थल पर सुरक्षा और आंतरिक राजनीति को उजागर करता है। कॉलेज के छात्र-छात्राओं द्वारा लिखित शपथ पत्र देकर शिक्षिकाओं का समर्थन करने से साफ है कि इस विवाद का सीधा असर संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ रहा है।

कॉलेज में आंतरिक विवाद और छात्रों पर दबाव


शासकीय नवीन महाविद्यालय नवागांव की महिला सहायक प्राध्यापकों ने अनावेदक (पुरुष प्राध्यापक) के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि वह छात्र-छात्राओं के सामने उनसे अभद्र व्यवहार करता है, धमकियां देता है और अपमानित करता है। इतना ही नहीं, आरोपी प्राध्यापक द्वारा विद्यार्थियों के नंबर काटने की धमकी देकर उन पर दबाव बनाने की बात भी सामने आई है। आज की सुनवाई के दौरान महिला प्राध्यापकों के पक्ष में कई छात्र-छात्राओं ने लिखित शपथ पत्र प्रस्तुत कर आरोपों का समर्थन किया है, जबकि अनावेदक पुरुष प्राध्यापक का दावा है कि सभी महिला विंग मिलकर उसके खिलाफ गुटबाजी कर रही हैं।

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चूंकि शासकीय नियमों के अनुसार आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट के बिना अंतिम फैसला संभव नहीं है, और आवेदिकागणों ने वर्तमान कॉलेज समिति में पक्षपात की आशंका जताई थी, इसलिए आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। महिला आयोग ने अपनी सहायक संचालिका को इस आंतरिक जांच समिति की सुनवाई प्रक्रिया के लिए विशेष रूप से नियुक्त किया है और 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।

एक अन्य मामले में, चरित्र हनन और अश्लील गाली-गलौज की शिकायत पर आयोग द्वारा कड़ी समझाइश दिए जाने के बाद अनावेदक ने समाज के समक्ष खेद व्यक्त किया, जिसके बाद उस प्रकरण को नस्तीबद्ध (बंद) कर दिया गया।

ऐतिहासिक सुनवाई: रायपुर के महिला आयोग कार्यालय में आज प्रदेश स्तर की 396वीं और रायपुर जिले की 185वीं जनसुनवाई आयोजित की गई।

कड़ा निर्देश: नवागांव कॉलेज मामले में निष्पक्ष न्याय के लिए महिला आयोग की सहायक संचालिका को जांच प्रक्रिया की कमान सौंपी गई है।

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समय-सीमा: आंतरिक जांच समिति को अपनी अंतिम रिपोर्ट 15 दिवस के भीतर महिला आयोग के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।

महिला आयोग की सहायक संचालिका 1 सप्ताह के भीतर शासकीय नवीन महाविद्यालय की आंतरिक जांच समिति की बैठक की तारीख सुनिश्चित करेंगी। दोनों पक्ष इस समिति के सामने अपने-अपने दस्तावेज और बयान दर्ज कराएंगे, जिसके बाद आने वाली 15 दिनों की रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने बिंदु और आंकड़ेवाले प्राध्यापक के खिलाफ सख्त दंडात्मक या प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।