नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन)

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने शहरी प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक बड़ा और दूरगामी कदम उठाया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य में “छत्तीसगढ़ नगरपालिक (अचल संपत्ति व्ययन) नियम, 2026” लागू कर दिए गए हैं। ये नियम राज्य के सभी नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों पर समान रूप से लागू होंगे और इनके लागू होने के साथ ही शहरी निकायों की संपत्तियों के प्रबंधन की पूरी व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।

सरकार का मानना है कि अब तक शहरी निकायों की संपत्तियों के उपयोग, आवंटन और प्रबंधन में एकरूपता की कमी थी, जिससे कई बार पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठते थे। नए नियमों के माध्यम से इन कमियों को दूर करते हुए एक स्पष्ट, पारदर्शी और नियमबद्ध व्यवस्था स्थापित की गई है।

  1. ई-टेंडर प्रणाली से पारदर्शिता को बढ़ावा

नए नियमों का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि अब शहरी निकायों की किसी भी अचल संपत्ति- जैसे भूमि, दुकान, भवन आदि-का विक्रय, लीज या अन्य प्रकार का हस्तांतरण मुख्यतः ई-टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। इस व्यवस्था से न केवल प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि मनमानी और पक्षपात की संभावना समाप्त होगी एवं ई-टेंडर प्रणाली लागू होने से अधिकतम बोली प्राप्त होगी, जिससे नगर निकायों की आय में वृद्धि होगी और वित्तीय स्थिति मजबूत होगी।

  1. विशेष परिस्थितियों में बिना टेंडर आवंटन की सुविधा
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हालांकि नियमों में यह भी प्रावधान रखा गया है कि यदि किसी सरकारी संस्था या सार्वजनिक हित से जुड़े संगठन को भूमि या संपत्ति आवंटित करनी हो, तो विशेष परिस्थितियों में बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए राज्य शासन की स्वीकृति से भी आवंटन किया जा सकता है। इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक उपयोग के महत्वपूर्ण कार्य-जैसे अस्पताल, स्कूल, सामुदायिक केंद्र आदि-अनावश्यक प्रक्रियात्मक देरी का शिकार न हों।

  1. संपत्ति मूल्य निर्धारण की मानक व्यवस्था

नए नियमों में संपत्तियों के मूल्य निर्धारण को भी अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाया गया है। अब किसी भी संपत्ति का रिजर्व प्राइस तय करने के लिए दो मुख्य आधार होंगे –

कलेक्टर द्वारा निर्धारित गाइडलाइन मूल्य और निर्माण एवं विकास की वास्तविक लागत, इन दोनों को जोड़कर अंतिम मूल्य तय किया जाएगा। इससे संपत्तियों का उचित मूल्य सुनिश्चित होगा और राजस्व की हानि रोकी जा सकेगी।

  1. लीज और किराया व्यवस्था में सुधार
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नियमों के तहत अचल संपत्तियों को सामान्यतः 30 वर्ष की लीज अवधि के लिए दिया जाएगा। इसके साथ ही लीज रेंट को भी स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है, जो न्यूनतम 0.5 प्रतिशत होगा।

इसके अलावा, किराया समझौतों को समय-समय पर बढ़ाने और उसमें वृद्धि करने का भी प्रावधान रखा गया है। इससे नगर निकायों को नियमित और स्थिर आय प्राप्त होगी।

5 फ्रीहोल्ड (Conversion) की सुविधा

नए नियमों में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि लीज पर दी गई संपत्तियों को निर्धारित प्रक्रिया और शुल्क के माध्यम से फ्रीहोल्ड में परिवर्तित किया जा सकेगा।

इससे नागरिकों को संपत्ति पर पूर्ण स्वामित्व प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, वहीं नगर निकायों को भी अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।

  1. PPP मॉडल को बढ़ावा

शहरी संपत्तियों के बेहतर उपयोग के लिए सरकार ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल को भी प्रोत्साहित किया है। इसके तहत पार्क, सामुदायिक भवन, बस स्टैंड, ऑडिटोरियम आदि का संचालन निजी भागीदारी से किया जा सकेगा।

हालांकि, नियमों में स्पष्ट किया गया है कि इन संपत्तियों का स्वामित्व नगर निकाय के पास ही रहेगा और निजी एजेंसियों को केवल संचालन एवं रखरखाव का अधिकार दिया जाएगा।

  1. आरक्षण और पारदर्शी आवंटन प्रणाली
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नए नियमों में समाज के विभिन्न वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए आरक्षण का प्रावधान भी किया गया है। इसके साथ ही संपत्तियों के आवंटन के लिए ई-लॉटरी प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।

  1. अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई

नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई लीज धारक शर्तों का उल्लंघन करता है, तो संबंधित प्राधिकारी को लीज निरस्त करने और संपत्ति पुनः कब्जे में लेने का अधिकार होगा।

यह प्रावधान अवैध कब्जों और अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद करेगा।

  1. पुराने नियमों की समाप्ति

इन नए नियमों के लागू होने के साथ ही वर्ष 1994 और 1996 में बनाए गए पुराने नियमों को निरस्त कर दिया गया है। इससे अब पूरे राज्य में एक समान और अद्यतन नियम लागू होंगे।

  1. क्या होगा इसका प्रभाव?

नए नियमों के लागू होने से नगर निकायों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा, सार्वजनिक संपत्तियों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और नागरिकों को अधिक सुव्यवस्थित सुविधाएं मिलेंगी।