रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग का VSK ऐप लॉन्च होते ही फेल हो गया। 16 जून से ऑनलाइन हाजिरी अनिवार्य की गई थी, लेकिन पहले ही दिन सर्वर क्रैश होने से प्रदेशभर के हजारों शिक्षक अटेंडेंस नहीं लगा पाए। उधर, गरियाबंद के एक हेडमास्टर ने निजी मोबाइल में ऐप इंस्टॉल करने से साफ इनकार कर दिया।

विभाग ने वेतन रोकने की दी थी चेतावनी

दरअसल शिक्षा विभाग ने 12 जून को आदेश निकला था कि 16 जून से VSK ऐप से हाजिरी लगेगी। नहीं लगाने पर उपस्थिति शून्य मानी जाएगी और जून का वेतन रोक दिया जाएगा। लेकिन पहले ही दिन ऐप ने दम तोड़ दिया। शिक्षक लॉगिन नहीं कर पाए। जहां लॉगिन हुआ, वहां हाजिरी दर्ज नहीं हुई। सर्वर बार-बार क्रैश होता रहा।

हेडमास्टर ने ठोका इनकार

उधर गरियाबंद के शासकीय प्राथमिक शाला महेंद्रगढ़ के हेडमास्टर इदरीश मोहम्मद खान ने DEO को पत्र लिख दिया। उन्होंने पत्र में कहा कि मोबाइल खुद के पैसे से खरीदा है। VSK ऐप सपोर्ट नहीं कर रहा। उक्त मोबाइल पूर्ण रूप से मेरी निजी संपत्ति है, जिस पर शासकीय कार्य कर पाने में स्वयं को असमर्थ पा रहा हूं।

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हेड मास्टर आगे लिखते हैं, मेरे निजी मोबाइल पर मैं अपनी विभिन्न निजी जानकारी सुरक्षित कर रखा हूं, app install करने पर गोपनीयता भंग होने और साइबर अपराध घटित होने की संभावना बनी रहती है, जो आये दिन लोगों के साथ घटित हो रही है।

डिवाइस दो, वरना कोर्ट जाएंगे

हेड मास्टर ने डीईओ को लिखे पत्र में छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट द्वारा एक शिक्षक को दी राहत और राज्य शासन के फैसले पर लगाई रोक का हवाला भी दिया है। हेड मास्टर ने लिखा है, अपने निजी मोबाइल में ऐप डाउन ना करने के संबंध में शिक्षक साथी कमलेश सिंह बिसेन ने हाई कोर्ट से स्टे ले रखा है, जिस पर न्यायालय में फैसला लंबित हैं। उक्त प्रकरण के निराकरण व मेरी निजता की रक्षा का हवाला देते हुए vsk app के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने से छूट देने की मांग की है। हेड मास्टर ने आगे लिखा है, ऐप के जरिए ऑनलाइन अटेंडेंस की अनिवार्यता जरुरी है तो फिर शासकीय रूप से डिवाइस उपलब्ध कराने की मांग की है। पत्र में हेड मास्टर ने आगे लिखा है, किसी प्रकार सख्ती करने की स्थिति में वह अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए बाध्य होगा।

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सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सर्वर ही नहीं चल रहा तो वेतन रोकने की धमकी किस आधार पर? क्या विभाग अपनी नाकामी का ठीकरा शिक्षकों पर फोड़ रहा है?