टीआरपी डेस्क। हिंदू धर्म को मानने वाली सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत का एक बहुत बड़ा और खास महत्व होता है। यह व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए पूरी श्रद्धा के साथ रखती हैं। लेकिन इस साल हिंदू कैलेंडर की विशेष गणना और अधिकमास यानी मलमास के प्रभाव के कारण वट सावित्री व्रत की तारीखों को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। अगर आप भी इस साल व्रत रखने वाली हैं, तो तारीखों के इस फेरबदल को जरूर समझ लें, ताकि पूजा-पाठ में कोई चूक न हो। आइए जानते हैं कि इस बार वट सप्तमी यानी बड़ साते और वट पूर्णिमा का त्योहार कब मनाया जाएगा।
मलमास के कारण क्यों बदला वट सावित्री व्रत का पूरा समय
धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषियों के अनुसार, वट सावित्री का मुख्य व्रत ज्येष्ठ महीने में रखा जाता है। इस साल ज्येष्ठ मास के दौरान ही अधिकमास यानी अतिरिक्त महीना आ जाने की वजह से हिंदू तिथियों के क्रम में थोड़ा अंतर आ गया है। इस बार अमावस्या के बाद काफी समय तक अधिकमास की अवधि रही। इसके पूरी तरह समाप्त होने के बाद ही दोबारा ज्येष्ठ महीने का शुक्ल पक्ष (चांदनी रात वाला पखवाड़ा) शुरू हुआ है। यही मुख्य वजह है कि इस साल पुरानी परंपरा के अनुसार आने वाली वट सप्तमी और वट पूर्णिमा की तारीखें सामान्य समय से थोड़ी आगे बढ़ गई हैं।
जानिए कब है वट सप्तमी यानी बड़ साते का व्रत
ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को हमारे देश के कई इलाकों में वट सप्तमी या स्थानीय भाषा में बड़ साते के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। कई क्षेत्रों में सुहागिन महिलाएं इस खास दिन पर भी अपने पति की लंबी आयु के लिए उपवास रखती हैं और वट यानी बरगद के पेड़ की विशेष पूजा-अर्चना करती हैं। इस साल बड़ साते का यह पावन व्रत 21 जून 2026 को रखा जाएगा।
वट पूर्णिमा की सही तारीख और पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त
भारत के कई हिस्सों, विशेषकर महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा के दिन ही वट सावित्री का मुख्य व्रत किया जाता है, जिसे वट पूर्णिमा (Vat Purnima) कहते हैं। इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा की तिथि 29 जून 2026, दिन सोमवार को पड़ रही है। धार्मिक पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 29 जून को तड़के सुबह 3 बजकर 6 मिनट से हो जाएगी। वहीं इस तिथि की समाप्ति अगले दिन यानी 30 जून को सुबह 5 बजकर 26 मिनट पर होगी। उदयातिथि के नियम के अनुसार, 29 जून को ही वट पूर्णिमा का मुख्य व्रत रखा जाएगा।
जानिए वट सावित्री व्रत का असली धार्मिक महत्व
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, सती सावित्री ने इसी बरगद के पेड़ के नीचे अपनी सूझबूझ से मृत्यु के देवता यमराज को हरा दिया था और अपने पति सत्यवान के प्राण वापस मांग कर लाई थीं। बरगद के पेड़ को हमारी संस्कृति में अमरता और मजबूती का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सुहागिनें व्रत रखकर बरगद के पेड़ की परिक्रमा करती हैं, उस पर कच्चा सूत लपेटती हैं और सावित्री-सत्यवान की कहानी सुनती हैं। कई जगहों पर इस दिन अपनी सास को सम्मान के तौर पर कपड़े और मिठाई का बायना यानी उपहार देने का भी नियम है।



