भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से एक बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आई है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा यानी री-नीट के आयोजन में जब महज तीन दिन बचे हैं, ठीक उसी वक्त भीलवाड़ा की साइबर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने एक बहुत बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया है। जयपुर में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाला एक 19 साल का छात्र सोशल मीडिया की आड़ में पेपर लीक का एक बहुत ही शातिर और हाईटेक खेल खेल रहा था। दिल्ली से मिले एक खुफिया इनपुट के बाद भीलवाड़ा पुलिस ने देर रात एक बजे पटेल नगर विस्तार इलाके में छापेमारी की। पुलिस ने इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड आकाश चौधरी को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।
नीट की साधारण गाइड से तैयार किया फर्जी पेपर, संपादन उपकरणों से दिया असली लुक
इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपी आकाश के पास कोई असली प्रश्नपत्र था ही नहीं। वह केवल परीक्षा दे रहे छात्रों की मजबूरी और उनके डर का फायदा उठाकर पैसे ऐंठने का एक बड़ा जाल बुन रहा था। आकाश ने अपने कमरे में रखी नीट परीक्षा की तैयारी वाली एक साधारण किताब के पन्नों को अपने मोबाइल से स्कैन किया। इसके बाद उसने कुछ संपादन उपकरणों यानी एडिटिंग टूल्स और डमी फॉर्मेटिंग का इस्तेमाल किया। उसने इन पन्नों को इस तरह से सजाया और बदला कि वे दिखने में बिल्कुल परीक्षा से पहले लीक हुए असली प्रश्नपत्र जैसे लगने लगे।
प्रतिबंधित टेलीग्राम चलाने के लिए लिया अमेरिकी वीपीएन का सहारा, बनाया पेपर माफिया चैनल
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी छात्र अपनी पहचान छिपाने के लिए अपराधियों की तरह शातिर दिमाग चला रहा था। भारत में सुरक्षा कारणों से अस्थाई रूप से बंद किए गए टेलीग्राम ऐप को अपने फोन में चलाने के लिए उसने अमेरिका के वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क यानी वीपीएन (Virtual Private Network) और प्रॉक्सी सर्वर्स का इस्तेमाल किया। आम भाषा में समझें तो वीपीएन एक ऐसी इंटरनेट तकनीक है जो यूजर के मोबाइल की असली लोकेशन को छिपाकर उसे किसी दूसरे देश में दिखा देती है। ऐसा उसने इसलिए किया ताकि भारतीय जांच एजेंसियां उसके इंटरनेट एड्रेस को आसानी से पकड़ न सकें। उसने टेलीग्राम पर पेपर माफिया नाम से एक गुप्त ग्रुप बनाया, जिससे देखते ही देखते करीब 52 परीक्षार्थी जुड़ गए। वह री-नीट का यह फर्जी पेपर चार-चार हजार रुपये में बेचने का सौदा कर रहा था और क्यूआर कोड भेजकर पैसे अपने खाते में मंगवा रहा था।
एस-मेक पोर्टल की सक्रियता से रात एक बजे पुलिस ने दी दबिश, मोबाइल और दस्तावेज जब्त
आरोपी आकाश को पूरा भरोसा था कि विदेशी नेटवर्क का इस्तेमाल करने के कारण भारतीय पुलिस उस तक कभी नहीं पहुंच पाएगी। लेकिन हमारी डिजिटल सुरक्षा विंग उससे दो कदम आगे निकली। भारत सरकार के एस-मेक पोर्टल (S-MEC Portal), जो इंटरनेट पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखता है, उसने इस फर्जीवाड़े को तुरंत पकड़ लिया। प्रताप नगर थाना प्रभारी सुनील ताड़ा के अनुसार, जब यह पुख्ता जानकारी भीलवाड़ा एसपी कार्यालय की विशेष शाखा और डीएसटी टीम तक पहुंची, तो बिना एक मिनट गंवाए रात के सन्नाटे में ठीक एक बजे आकाश के ठिकाने पर दबिश दी गई। पुलिस ने मौके से उसका मोबाइल फोन, नीट की गाइड और कई अन्य डिजिटल दस्तावेज बरामद कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।



